4.8.17

मूत्र विकार के के आयुर्वेदिक घरेलु उपचार/Ayurvedic Home Remedies for Urinary Disorders/


मूत्र विकार के अंतर्गत कई रोग आते हैं जिनमें मूत्र की जलन, मूत्र रुक जाना, मूत्र रुक-रुककर आना, मूत्रकृच्छ और बहुमूत्र प्रमुख हैं| यह सभी रोग बड़े कष्टदायी होते हैं| यदि इनका यथाशीघ्र उपचार न किया जाए तो घातक परिणाम भुगतने पड़ते हैं|
मूत्र विकार का कारण
यदि मूत्राशय में पेशाब इकट्ठा होने के बाद किसी रुकावट की वजह से बाहर न निकले तो उसे मूत्रावरोध कहते हैं| स्त्रियों में किसी बाहरी चीज के कारण तथा पुरुषों में सूजाक, गरमी आदि से मूत्राशय एवं मूत्र मार्ग पर दबाव पड़ता है जिससे पेशाब रुक जाता है| वृद्ध पुरुषों की पौरुष ग्रंथि (प्रोस्टेट ग्लैंड) बढ़ जाती है जिसके कारण उनका मूत्र रुक जाता है|


मूत्रकृच्छ में पेशाब करते समय दर्द होता है| जब मूत्राशय में दर्द उत्पन्न होता है तो पेशाब रुक जाता है| इसी प्रकार हिस्टीरिया (स्त्री रोग), चिन्ता, सिर में चोट लग जाना, आमाशय का विकार, खराब पीना, आतशक, कब्ज, पौष्टिक भोजन की कमी आदि के कारण भी बार-बार पेशाब आता है|

मूत्र विकार की पहचान
मूत्र की कमी या न निकलने से मूत्राशय फूल जाता है| रोगी को बड़ी बेचैनी होती है| मूत्र बड़े कष्ट के साथ बूंद-बूंद करके निकलता है| कब्ज, मन्दाग्नि, अधिक प्यास, पेशाब अधिक आने, मूत्र पीला होने आदि के कारण रोगी को नींद नहीं आती| वह दिन-प्रतिदिन कमजोर होता जाता है| कमर, जांघों तथा पिंडलियों में दर्द होता है|
मूत्र विकार के घरेलु नुस्खे इस प्रकार हैं:
मक्का, पानी और मिश्री
मक्के के भुट्टे (कच्ची मक्का) को पानी उबाल लें| फिर लगभग एक गिलास पानी छानकर उसमें मिश्री मिलाकर पी जाएं| इससे पेशाब की जलन जाती रहती है|
ईसबगोल
लगभग चार चम्मच ईसबगोल की भूसी पानी में भिगो दें| फिर उसमें बूरा डालकर पी जाएं| पेशाब की जलन शान्त हो जाएगी|
चावल और चीनी
एक कप चावल का मांड़ लेकर उसमें चीनी मिलाकर पिएं|
तरबूज और मिश्री

पेशाब की जलन दूर करने के लिए रात में तरबूज को ओस में रखें तथा सुबह उसका रस निकालकर मिश्री मिलाकर पी जाएं|
फालसे और काला नमक
चार चम्मच फालसे के रस में काला नमक डालकर पिएं| पेशाब की जलन जाती रहेगी|
पानी और जौ
एक गिलास पानी में 25 ग्राम जौ उबालें| फिर उसे ठंडा करके केवल पानी को घूंट-घूंट पिएं|
पानी, काला नमक, जीरा, कालीमिर्च और शक्कर
थोड़ा-सा बथुआ पानी में उबालें| फिर उसमें काला नमक, भुना जीरा, कालीमिर्च तथा जरा-सी शक्कर डालकर सेवन करें|
प्याज, पानी और चीनी
50 ग्राम प्याज के छोटे-छोटे टुकड़े काटें| फिर एक गिलास पानी में वह प्याज उबालकर छान लें| अब उसमें थोड़ी-सी चीनी डालकर सेवन करें| यह मूत्र रोगी के लिए बड़ा अच्छा नुस्खा है|
पानी, शक्कर और शहद
हरे आंवले के रस को पानी में मिलाकर पिएं| स्वाद के लिए जरा-सी शक्कर या शहद डाल लें|
कलमी शोरा और इलायची
कलमी शोरा दो चम्मच तथा बड़ी इलायची के दानों का चूर्ण एक चम्मच-दोनों को मिलाकर सेवन करें|



कालीमिर्च और शहद

बेल के पत्तों को पानी में पीस लें| इसमें जरा-सी कालीमिर्च तथा दो चम्मच शहद मिलाएं| फिर घूंट-घूंट पी जाएं|
सोंठ, दूध और मिश्री
यदि पेशाब करते समय दर्द होता हो तो दूध में सोंठ और मिश्री मिलाकर सेवन करें|
काला तिल और गुड़
काले तिल में गुड़ मिलाकर खाने से बहुमूत्र रोग ठीक हो जाता है|
जावित्री, मिश्री और गाय का दूध
1 ग्राम जावित्री तथा 5 ग्राम मिश्री को गाय के दूध के साथ लें|
हल्दी और दूध
सुबह-शाम 5-5 ग्राम पिसी हल्दी को दूध के साथ लेने से बहुमूत्रता की व्याधि खत्म हो जाती है
पालक और नारियल
यदि पेशाब में जलन हो, खुलकर पेशाब न आए या बूंद-बूंद पेशाब हो तो पालक के एक कप रस में आधा कप नारियल का पानी मिलाकर पी जाएं|
मूत्र विकार में क्या खाएं क्या नहीं 
उचित समय पर पचने वाला हल्का भोजन करें| सब्जियों में लौकी, तरोई, टिण्डा, परवल, गाजर, टमाटर, पालक, मेथी, बथुआ, चौलाई, कुलफा आदि का सेवन करें| दालों में मूंग व चने की दाल खाएं| अरहर, मलका, मसूर, मोठ, लोबिया, काबुली चने आदि का सेवन न करें| फलों में सेब, पपीता, केला, नारंगी, संतरा, ककड़ी, खरबूजा, तरबूज, चीकू आदि का प्रयोग करें| गुड़, लाल मिर्च, मिठाई, तेल, खटाई, अचार, मसाले, मैथुन तथा अधिक व्यायाम से परहेज करें| गन्ने के ताजे रस में नीबू तथा सेंधा नमक मिलाकर पीने से मूत्र की जलन दूर होती है| मूत्र खुलकर आता है|
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