30.9.16

दांत दर्द का घरेलू उपचार | Dant Dard ka Gharelu ilaj


सबको उम्र के किसी न किसी पड़ाव में दाँत के दर्द को सहना ही पड़ता है। यह दर्द कितना तकलीफदेह होता है यह तो सभी जानते हैं। इस दर्द से जल्द से जल्द छुटकारा पाने के लिए लोग बहुत तरह की दवाईयाँ लेते हैं, लेकिन इन दवाईयों से बचना ही अच्छा होता है। अब आप जानना चाहेंगे कि कैसे बिना दवाई के इस दर्द को साठ सेकेंड में कम किया जा सकेगा?
दांतों में दर्द होने की वजह कई होती है, दांतों में कीड़े लगना या दांतों की जड़ों का ढीला पड़ जाना आदि। कुछ लोग मजे-मजे में दांतों में स्टिक डाल लेते है जिससे उनके दांतों में गैप हो जाता है, इससे भी दर्द होने लगता है।
दांतों में दर्द होने पर आप सही से ब्रश नहीं कर पाते है और सांसों की बदबू, उसके बाद मुंह में सड़न जैसी भी कई समस्‍याएं हो जाती हैं। अगर आपको अपने दांतों के दर्द से छुटकारा पाना है तो कुछ घरेलू उपाय अपनाएं, जो कि निम्‍न प्रकार हैं।
आपके टूथपेस्ट में 'नमक' हो या न हो मगर जब दांतों में दर्द होता हो तो गर्म पानी में नमक डालकर कुल्ले करने से तुरंत आराम मिलता है। दांतों के दर्द में तुरंत आराम के लिए ऐसे ही कुछ आराम और घरेलू उपायों की जानकारी आज हम आपको देंगे जिनकी मदद से आपको दर्द से तुरंत राहत महसूस होगी।
लौंग:
अगर आपके दांतों में दर्द होता है तो लौंग को दांतों के बीच दबा कर रखें, इससे दर्द में काफी आराम मिलेगा। लौंग में काफी मात्रा में एनेस्थेटिक और एनलगेसिक गुण होते हैं जो दर्द को दूर भगा देते हैं। दिन में दो से तीन बार लौंग को रखना चाहिए और इस दौरान कुछ भी न खाएं।
काली मिर्च पाउडर




दांतों में तेज दर्द से आराम के लिए एक चौथाई चम्मच नमक में एक चुटकी काली मिर्च पाउडर मिलाकर दर्द वाले हिस्से पर लगाएं। आपको तुरंत आराम मिलेगा।
नमक:
दांतों में दर्द होता हो, तो पानी का हल्‍का गुनगुना करके उसमें नमक डाल लें और गरारा करें, और मुंह में भरकर सेंक दें। इससे दांतों का संक्रमण दूर हो जाएगा और आपको दर्द से निज़ात मिल जाएगा। सुबह ब्रश करते समय भी आप नमक वाले पानी का ही इस्‍तेमाल करें।
हींग:
हींग में कई आयुर्वेदिक गुणों का समावेश होता है। इसमें कई एंटी-इंफ्लामेट्री, एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो दांतों से दर्द में राहत प्रदान करते है। इसके इस्‍तेमाल के लिए आप हींग को बहुत कम मात्रा में लें और उसे दर्द वाली जगह पर लगा लें या इसे एक चौथाई पानी में घोल बनाकर माउथवॉश की तरह इस्‍तेमाल करें।




आलू
दांतों में दर्द के साथ सूजन हो तो आलू छीलकर उसकी स्लाइस उस भाग पर 15 मिनट तक रखें, तुरंत राहत मिलेगी।
पिपरमेंट:
पिपरमेंट से भी दांतों का दर्द दूर भग जाता है, खासकर उम्र बढ़नेपर होने वालों दांतों का दर्द भी पिपरमेंट से ही ठीक होता है। पिपरमेंट ऑयल की कुछ बूंदों को दर्द वाले हिस्‍से पर डाल लें और फिर गर्म पानी से गरारा कर लें। आप चाहें तो पिपरमेंट ऑयल की कुछ बूंदों को पानी में डालकर माउथवॉश की तरह भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं।
सरसो का तेल
तीन से चार बूंद सरसो के तेल में एक चुटकी नमक डालकर दांतों व मसूड़ों पर मसाज करें। इससे न सिर्फ दांतों में दर्द से आराम मिलता है बल्कि मसूड़े भी मजबूत होते हैं।
प्‍याज:
प्‍याज में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं जो दांतों के दर्द से राहत दिला सकते हैं। इसे कच्‍चा खाने से दांतों के दर्द में आराम मिलता है। अगर आपके दांतों में दर्द इतना ज्‍यादा है आप इसे कच्‍चा नहीं खा सकते हैं तो इसका रस निकालकर दांतों में निकाल लें।
बर्फ




दांतों के दर्द वाले हिस्से पर 15 से 20 मिनट तक बर्फ से सेंकाई करें। दिन में कई बार दांतों को बर्फ से सेंकने से दर्द से छुटकारा मिलेगा।
लहसून:
लहसून के गुणों के बारे में हम सभी को पता है। लाभकारी लहसून को अगर छीलकर उसकी कलियों को चबाया जाएं, तो दांतों के दर्द में आराम मिलता है। दिन में दो बार दो-दो कलियों को चबाने से जल्‍दी ही दर्द के दांतों से छुटकारा मिल जाता है।
ब्रांडी
रुई को ब्रांडी में डुबोएं और दांतों में दर्द वाले स्थान पर लगाएं। इससे भी दांत का दर्द दूर होता है।
अमरूद की पत्तियां:
अमरूद की ऊपर वाली ताजा कोमल पत्तियों को तोड़ लें और उन्‍हे दांतों में दर्द वाले हिस्‍से पर रखकर दबा लें, इससे दर्द में काफी राहत मिलेगी। हर दिन चार बार ऐसा करने काफी राहत मिलती है। आप चाहें तो इन पत्तियों को एक कप पानी में उबालकर उस पानी को माउथवॉश की तरह इस्‍तेमाल कर सकते हैं।

26.9.16

सब्जियाँ उबालकर खाने के फायदे




सब्‍जियों को जब उबाल कर खाया जाता है, तो उनकी ताकत दोगुनी बढ़ जाती है। कुछ सब्‍जियां जैसे, पालक, गाजर, शकरकंद और पत्‍तागोभी आदि का स्‍वाद और पोषण तभी निखरता है जब इन्‍हें उबाल कर खाया जाए। कुछ सब्‍जियों को उबाल कर और कुछ को आंच पर पका कर ही उनमें मौजूदा पोषण को दोगुना किया जा सकता है।
अगर आप नीचे दी हुई इन सब्‍जियों को हफ्ते में दो बार उबाल कर खाएंगे तो आपका मोटापा बहुत जल्‍दी घटेगा। आप चाहें तो इन उबली सब्‍जियों को सलाद में मिक्‍स कर के खा सकते हैं।* फूल गोभी
भाप में पकी हुई फूल गोभी काफी पौष्‍टिक मानी जाती है। ऐसा करने पर इसमें मौजूदा न्‍यूट्र्रियन्‍ट्स और विटामिन्‍स नष्‍ट नहीं हो पाते।
*पत्‍ता गोभी
पत्‍ता गोभी जब उबाल कर खाई जाती है, तो उसका टेस्‍ट और भी ज्‍यादा बढ़ जाता है। उबालने के लिये जिस पानी का उपयोग किया गया हो, उसा प्रयोग कर लेना चाहिये क्‍योंकि इसमें सबसे ज्‍यादा पोषण होता है।





*ब्रॉकली
ब्रॉकली को उबाल कर खाने में ज्‍यादा टेस्‍ट मालूम पड़ता है। अगर आपको यह डिश सादी ही खानी हो तो उबालते समय इसमें थोड़ा सा ऑलिव ऑयल मिला लें।
* गाजर प्‍लेन पानी में मुठ्ठी भर गाजर काट कर डालें। इसमें एक चुटकी नमक और थोड़ी सी काली मिर्च मिक्‍स करें। फिर इसे उबाल कर खाएं, यह आपकी आंखों के लिये काफी पौष्टिक होगी।
चुकन्‍दर
खून की कमी और पीरियड्स की समस्‍या को दूर रखने के लिये दिन में एक चुकन्‍दर उबाल कर खाना चाहिये। चुकन्‍दर को 3 मिनट से ज्‍यादा नहीं उबालना चाहिये।
* आलू
जब भी आप आलू खाएं तो उसे उबाल कर ही खाएं क्‍योंकि उसमें कम कैलोरीज़ होती हैं।
* बींस
बींस को कम से कम 6 मिनट तक उबालें। फिर उसमें चुटकी भर नमक और काली मिर्च मिलाएं। उबली हुई बींस मधुमेह के लिये अच्‍छी होती है।
*पालक
वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर हरी पत्‍तेदार सब्‍जियों को उबाल कर खाया जाए तो उसकी ताकत दोगुनी बढ़ जाती है। खास तौर पर मेथी और पालक की सब्‍जियां।
* स्‍वीट कार्न
स्‍वीट कार्न को उबालने में काफी पानी और समय लगता है। पर इस को हम बिना उबाले खा भी नहीं सकते। स्‍वीट कार्न में पोषण और ढेर सारे रेशे होते हैं जो कि कब्‍ज को दूर रखता है।
* शकरकंद
शकरकंद में काफी सारा कार्ब होता है जो कि शरीर के लिये बेहद जरुरी है। अगर आप डाइटिंग पर हैं तो शकरकंद खाएं।


17.9.16

पैरों में होने वाले दर्द 7 दिन मे गायब: Pain in the legs will disappear in 7 days


पैरों में होने वाले दर्द का कारण और आसान उपचार

हमें अक्‍सर पैरों में दर्द होने लगता है। पैरों के दर्द की कई वजहें हो सकती हैं, मसलन मांसपेशियों में सिकुड़न, मसल्स की थकान, ज्यादा वॉक करना, एक्सरसाइज, स्ट्रेस, ब्लड क्लॉटिंग की वजह से बनी गांठ, घुटनों, हिप्स व पैरों में सही ब्लड सर्कुलेशन न होना। पानी की कमी, सही डाइट ना लेना, खाने में कैल्शियम व पोटेशियम जैसे मिनरल्स और विटामिंस की कमी, अंदर गहरी चोट होना, किसी प्रकार का संक्रमण हो जाना, नाखून का पकना आदि। कई बार शरीर की हड्डियां कमजोर होने से भी पैरों में दर्द की शिकायत हो जाती है।
केमिकल बेस्ड दवाइयां ज्यादा मात्रा में लेना, चोट, कॉलेस्ट्रॉल लेवल कम होना, शरीर व मांसपेशियों का कमजोर पड़ जाना, आर्थराइटिस, डायबिटीज, कमजोरी, मोटापा, हॉमोर्नल प्रॉब्लम्स, नसों में दर्द, स्किन व हड्डियों से संबंधित इंफेक्शन और ट्यूमर से भी पैरों में दर्द की शिकायत रहती है।
*रेग्युलर एक्सरसाइज और योग आपको दिमागी व फिजिकल तौर पर फिट रखता है। यह आपको पैरों में दर्द और सांस की समस्या से भी दूर रखता है।
*कुछ खास तरह की लेग स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज भी फायदेमंद साबित होती है। दरअसल, इससे ब्लड सर्कुलेशन और मस्कुलर कॉन्ट्रेक्शन सही होता है।



*यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप अपने वजन को कंट्रोल में रखें। फिटनेस और सही डाइट को अच्छी तरह फॉलो करें।
* नीम के पत्तो को पानी में उबाले और इस पानी में थोड़ी फिटकरी भी मिक्स कर ले, जितना गर्म सह सको इस पानी में अपने पैरो को 10 से 15 मिनट तक रखे।
* पानी पीना बहुत जरूरी है। यह मसल्स की सिकुड़न और पैरों के दर्द को कम करता है। जिम या वॉक पर जाने या किसी भी तरह की फिजिकल एक्सरसाइज करने से पहले सही मात्रा में पानी पीएं। यह बॉडी को पूरी तरह हाइड्रेट रखता है।
* जितना हो सके, उतना फ्रूट जूस पीएं। बैलेंस्ड न्यूट्रिशियस डाइट लें। इसमें हरी सब्जियां, गाजर, केले, नट्स, अंकुरित मूंग, सेब, खट्टे फल, संतरा और अंगूर जैसे फलों को शामिल करें।
*दूध से बने प्रॉडक्ट्स ज्यादा लें। चीज, दूध, सोयाबीन, सलाद वगैरह से आपको पूरी मात्रा में विटामिंस मिलेंगे। अपने खाने में ऐसी चीजों की मात्रा बढ़ा दें जिनमें कैल्शियम और पोटैशियम ज्यादा हो।

सामान्य पैरों के दर्द को दूर करने के उपाय:

 *गर्म पानी में ऑयल की बूंद डालकर सेंक लें। पैरों को पैडीक्‍योर करें और फिर क्रीम लगाकर रिलेक्‍स करें।
कई बार पैरों में ब्‍लड सर्कुलेशन सही ढंग से न होने की वजह से भी पैरों में दर्द होने लगता है। इसलिए पैरों की *हल्‍की मसाज दें, इससे भी दर्द चला जाता है।
* फुट मसाज: पैरों के दर्द को दूर करने में फुट मसाज बहुत कारगर होती है। टेनिस बॉल या रोलिंग पिन से आप फुट मसाज कर सकते हैं। इससे काफी राहत मिलती है।
* लैवेंडर ऑयल को दो चम्‍मच लें, इसमें ऑलिव ऑयल मिक्‍स करें और पैरों पर लगाएं। सर्कुलर मोशन में मसाज करें। आराम मिलेगा।
*. लौंग के तेल को तिल के तेल के साथ मिलाकर पैरों में लगाएं। इससे पैरों की खुजली दूर होगी।
*एक्‍युप्रेशर वाली चप्‍पलें पहनें।
*ठंडे पानी से अपने पैरों को धो लें। चाहें तो 15 मिनट तक भिगोकर भी रख सकते हैं।
* ठंडे पानी से पैरों को धुलने के बाद गर्म पानी से पैरों को सेंक दें। पानी हल्‍का गुनगुना होना चाहिए।
* अगर आपको ऐसा लगता है कि आपके पैर में किसी प्रकार का संक्रमण है तो आप गुनगुने पानी में नमक डालकर पैरों की सिकाई करें। इससे पैरों में होने वाले बैक्‍टीरिया मर जाते हैं।. पिपरमेंट ऑयल या रोजमेरी ऑयल से पैरों की मालिश करें। वैसे लैवेंडर ऑयल भी मददगार होता है।




*हर दिन साफ मोजे पहनें।
*पैरों को नियमित रूप से पैडीक्‍योर करवाएं।
*पैरों को धोने के लिए एंटी-बैक्‍टीरियल प्रोडक्‍ट का इस्‍तेमाल करें।
*जोड़ो और हड्डियों में होने वाले दर्द के कुछ घरेलु आयुर्वेदिक उपचार।
*विजयसार का चूर्ण :- विजयसार का चूर्ण एक छोटा चम्मच एक गिलास पानी में भिगोये और 15 घंटे के बाद इसको अच्छी तरह निचोड़ छान कर इसको घूँट घूँट कर पी लीजिये।
*अगर आपको पत्थरी (स्टोन) की समस्या नहीं है तो आप इस पानी में गेंहू के दाने के सामान चुना (जो पान में लगते हैं, जो लोग जर्दे में मिलते हैं) मिलाये। और इसको पिए।
*अरण्डी के तैल से मालिश करने से भी दर्द में फायदा होता हैं।
*देसी घी के साथ गिलोय का रस लेने से भी इसमें बहुत फायदा होता हैं।
*गर्मियों में एक चम्मच अलसी के बीज नित्य खाए और सर्दियों में ३ चम्मच खाए।







16.9.16

खून की कमी दूर करते हैं ये फल :: Eat these fruits in anemia

एनीमिया रक्त की एक जानी मानी बीमारी है। यदि आपको एनीमिया है तो इसका अर्थ यह है कि आपके रक्त में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी है। इसका अर्थ यह भी है कि आपके रक्त में हीमोग्लोबिन का स्तर कम है। क्या आप जानते हैं कि कुछ ऐसे फल हैं जिनका सेवन एनीमिक होने पर अवश्य करना चाहिए? हीमोग्लोबिन रक्त की कोशिकाओं में उपस्थित एक प्रोटीन है जो ऑक्सीजन को शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुंचाने में मदद करता है।
एनीमिया के उपचार में फल बहुत सहायक हैं और जब आप इनके बारे में जान जायेंगे तब आप भी इस स्थिति से निपटने में इन फलों का उपयोग कर सकेंगे। एनीमिया का उपचार इसके कारण और गंभीरता के बारे में जानकर किया जा सकता है। सामान्यत: एनीमिया के उपचार में दवाईयां, आहार में परिवर्तन और कभी कभी सर्जरी शामिल हैं। प्रत्येक फल के गुणों के बारे में पढ़ें तथा जानें कि ये फल किस तरह एनीमिया के उपचार में सहायक हैं।
संतरा - आपके शरीर के लिए विटामिन सी अत्यंत आवश्यक होता है क्योंकि यह शरीर को आयरन अवशोषित करने में सहायता करता है। खट्टे फल विटामिन सी का अच्छा स्त्रोत होते हैं। संतरे में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है तथा इसका उपयोग करके एनीमिया से बचा जा सकता है।
आम - आम में आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है अत: एनीमिया होने की स्थिति में इनका सेवन करना बहुत अच्छा माना गया है। एनीमिया के उपचार के लिए इसे सर्वोत्तम माना गया है।

कीवी - कीवी में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यदि आप एनीमिक हैं और आयरन की गोलियाँ खा रहे हैं तो गोलियों के साथ साथ आपको कीवी भी खाना चाहिए। कीवी बहुत स्वादिष्ट होता है तथा एनीमिया की स्थिति से निपटने के लिए यह एक उत्तम फल है।
अनार - अनार में विटामिन सी तथा आयरन पाया जाता है। ये शरीर में न केवल रक्त प्रवाह को बढ़ाते हैं बल्कि एनीमिया के लक्षणों जैसे चक्कर आना, थकान, कम$जोरी आदि के उपचार में भी बहुत प्रभावी हैं। प्रतिदिन एक अनार खाएं या इसके रस का सेवन करें।
केला - शरीर में नई कोशिकाओं के निर्माण और रखरखाव के लिए फोलिक एसिड बहुत महत्वपूर्ण होता है। यह एनीमिया के उपचार में भी बहुत मदद करता है, विशेष रूप से तब जब आप गर्भवती हों। केले में फोलिक एसिड पाया जाता है तथा अन्य कई फलों की तरह यह ब्लड काउंट को बढ़ाने में सहायक होता है।
आलू बुखारा - आलूबुखारा तथा इसका रस आयरन के बहुत अच्छे स्त्रोत हैं तथा एनीमिया के उपचार के लिए उत्तम फल है। एनीमिया से बचने के लिए अपने नाश्ते में प्रतिदिन आलूबुखारे शामिल करें।
सेब - सेब उन कई फलों में से एक है जो ब्लड काउंट बढ़ाने में सहायक है। सेब में विटामिन सी होता है जो शरीर को नॉन-हेम आयरन अवशोषित करने में मदद करता है। एनीमिया से बचने के लिए प्रतिदिन एक सेब खाएं।
एप्रीकॉट (खुबानी) - एप्रीकॉट में आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है तथा यह आपके शरीर में आयरन के स्तर को बढ़ाने में सहायक होता है। अपने शरीर में आयरन के स्तर को बढ़ाने के लिए प्रतिदिन नाश्ते में या मिड-डे स्नैक के रूप में एक मुट्ठी एप्रीकॉट खाने की आदत डाल लें।
मौसंबी - मौसंबी में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है तथा यदि आप एनीमिया से ग्रसित हैं तो इसका सेवन अवश्य करना चाहिए। आप इसे कच्चा भी खा सकते हैं या इसका जूस भी पी सकते हैं।









7.9.16

सायनस ,नाक की हड्डी बढ़ने के उपचार




आजकल की अनियमित जीवन शैली में लोग अपनी सेहत का सही प्रकार से ख्याल नहीं रख पाते. जिसे कारण उन्हें अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है. साइनस नाक में होने वाला एक रोग है. आयुर्वेद में इसे प्रतिश्याय नाम से जाना जाता है. साइनस मानव शरीर की खोपड़ी में हवा भरी हुई कैविटी होती हैं जो हमारे सिर को हल्कापन व सांस वाली हवा की नमी को युक्त करते हैं.
साइनस में नाक तो अवरूद्ध होती ही है, साथ ही नाक में कफ आदि का बहाव अधिक मात्रा में होता है. जब किसी व्यक्ति को साइनस का संक्रमण हो जाता है तो इसके कारण व्यक्ति के सिर में भी अत्यधिक दर्द होने लगता है. नाक का रोग होने के कारण व्यक्ति को सांस लेने में रुकावट, हड्डी का बढ़ना, तिरछा होना, साइनस भरना तथा एलर्जी जैसी समस्याएं होने लगती हैं. इस समस्या का सही समय पर उपचार ना करने के कारण अस्थमा और दमा जैसे कई गंभीर रोग हो सकते हैं
साइनस के लक्षण ( Symptoms of Sinus ) :
जब कभी साइनस संक्रमित होता है तो इसके लक्षणों को आँखों और माथों पर साफ़ तौर से महसूस किया जा सकता है.

· सिर दर्द ( Headache ) : इस दर्द में अगर आप लेटना भी चाहो तो आपको तेज सिरदर्द होने लगता है.

· पलकों के ऊपर दर्द ( Pain over Eyes ) : आपको ऐसा महसूस हो रहा होता है कि आपकी आँखें अपने आप बंद हो रही है, आँखों के ऊपर इतना दर्द होता है कि आप अपनी उँगलियों से अपनी आँखों को खोलने की कोशिश करते हो.

· आधासीसी ( Migraine ) : अगर ये अपने अगले चरण में चला जाएँ तो आपको आधासीसी का दर्द आरम्भ हो जाता है अर्थात आपको आधे सिर में दर्द रहने लगता है.

· नाक बंद होना ( Nasal Congestion ) : इसे आप साइनस का प्रमुख लक्षण मान सकते है क्योकि साइनस सीधे रूप से नाक को ही प्रभावित करता है और उसे बंद करके रोगी की हालत खराब करता है.

· नाक से पानी गिरना ( Water from Nose ) : क्योकि नाक में काफ जम जाता है तो नाक से पानी आना भी आरम्भ हो जाता है.
*अकसर कुछ लोगों को साँस लेने में तकलीफ होती है, उन्हें नाक की हड्डी बढ़ी हुई महसूस होती है, नाक में कुछ जमा हुआ सा महसूस होता है। और जब वे नाक में जमा मैल निकालने की कोशिश करते हैं तो उनकी नाक से खून भी निकलने लगता है।
*नाक विशेषज्ञों का कहना है कि एक बार नाक की हड्डी बन जाने के बाद वह कभी भी किसी दिशा में नहीं बढ़ती। जो लोग यह समझते हैं कि हड्डी बढ़ गई है तो उसके कई कारण हैं।
अगर बचपन में कभी हड्डी पर चोट लग गई हो, दब गई हो या दबाव से अपने स्थान से खिसक जाए तो इन दशाओं में नाक की मध्य हड्डी एक तरफ झुक जाती है।
*सिकाई ( Give Warmth ) : साइनस में सिकाई बहुत कारगर होती है तो आप भी 2 गिलास पानी को गर्म करके उसे किसी रबड़ या प्लास्टिक की बोतल में डाल लें और उससे अपने चेहरे, आँखों और सिर की सिकाई करें. आप इस बोतल को कुछ देर गले पर भी अवश्य रखें ताकि आपको मलगम में राहत मिल सके.

·*     सहजन ( Drumstick ) : अगर साइनस बहुत अधिक परेशान करने लगा है तो आप सहजन की फलियों का सूप निकालें और उसमें अदरक, काली मिर्च, प्याज और लहसुन डालकर एक काढा तैयार करें. इस तरह आपको रोजाना 1 कप काढा बनाना है और उसे गरमा गर्म पीना है.

· *प्याज ( Onion ) : वहीँ अगर आपकी नाक से अधिक पानी बह रहा है तो आप अपनी नाक में थोडा प्याज का रस डाल लें. इससे नाक से पानी बहना बंद होता है और आपको साइनस से होने वाले सिर दर्द से भी आराम मिलता है.

· *सब्जियां ( Vegetables ) : साइनस होने पर आपको अपने आहार पर ख़ास ध्यान देना होता है क्योकि आहार से आपको ताकत और वे पौषक तत्व मिलते है जो बीमारियों से लड़ने में सक्षम होते है. इसलिए आप रोजाना 300 मिली गाजर, 200 ग्राम पालक और 100 –100 ग्राम ककड़ी व चुकंदर का रस निकालकार पियें.

·*     गर्म पेय ( Hot Drinks ) : साइनस होने पर आप गर्म पेय जैसेकि सूप इत्यादि अवश्य पियें क्योकि इन्हें साइनस में बहुत कारगर माना जाता है. ये छाती में और नाक में जमे हुए कफ़ को बाहर निकालने में सहायक होता है और बंद नाक को खोलता है. अगर आप चिकन का सूप पिए तो आपके शरीर को अंदर से गर्मी मिलती है और आपको जल्दी आराम मिलता है.
*नाक की हड्डी टूटने, दबने या कभी-कभी पूरी तरह अपने स्थान से खिसकने के कारण भी नाक का आकार ही टेढ़ा दिखाई देने लगता है।
*जब बच्चा युवावस्था में आता है तो ऐसी दशा में टूटी हुई नाक आधी लंबाई में तो बढ़ती ही है, इसके साथ ही टूटा हिस्सा भी अलग दिशा में बढ़ने लगता है, जो नसिका को छोटा कर देता है तथा नाक का छेद छोटा होने से साँस और जुकाम रहने की तकलीफें प्रारंभ हो जाती हैं।
*तीसरी दशा में नाक की हड्डी टूटती नहीं, बल्कि दबकर मुड़ जाती है और 'एस' या 'सी' के आकार में आकर नाक के किसी हिस्से के एक छिद्र को छोटा कर देती है। इससे नाक के एक छिद्र से तो साँस भी नहीं ली जा सकती और दूसरे छिद्र में ज्यादा खुला स्थान होने के कारण धूल के कण भी साँस के साथ भीतर जाने का डर बना रहता है।
शुद्धता ( Purity ) : आपके लिए शुद्धता बहुत जरूरी है इसलिए आप शुद्ध भोजन खाएं, अगर भोजन ज्यादा शुद्ध ना भी हो तो शुद्ध जल अवश्य पिए और आपके लिए सर्वाधिक जरूरी है शुद्ध वायु का होना. क्योकि ये नाक संबंधी रोग है तो आपके लिए वायु बहुत मायने रखती है. किसी भी तरह की एलर्जी आपके रोग को बहुत बढ़ा सकती है और आपके आँख, नाक, मस्तिष्क, कान या फेफड़ें इत्यादि किसी को भी नुकसान पहुंचा सकती है.
चोट या दबाव के अलावा कभी-कभी गर्भ में बच्चे की नाक पर दबाव पड़ जाने से नाक की हड्डी मुड़-तुड़ जाती है। कई बार फारसेप डिलीवरी में भी नाक पर चोट लग जाती है, इसलिए प्रसव के दौरान 10-15 मिनट का सामान्य समय पार हो जाने पर अन्य विकारों के साथ यह विकार आना भी स्वाभाविक है
हल्का बुखार ( Mild Fever ) : जब व्यक्ति को सिर दर्द,बंद नाक और आंखों में भारीपन रहने लगता है तो उसके शरीर में निरंतर ताप बना रहता है जिसे बुखार का नाम दे दिया जाता है.
· सुजन ( Swelling ) : रोगी इस बिमारी से इतना परेशान और तनाव ग्रस्त हो जाता है कि उसके मन में निराशा छा जाती है जो सुजन के रूप में उसके चेहरे से साफ़ दिखाई देने लगती है. सुजन का एक कारण झिल्ली में सुजन भी होता है.
साइनस के रोग की एक खास बात ये भी है कि इसके अगले चरण इससे भी भयंकर और गंभीर रोग लाते है जैसेकि अस्थमा, आधासीसी, सिर में नासूर इत्यादि. वैसे तो साइनस में अधिकतर लोग ऑपरेशन का सहारा लेते है किन्तु इसमें बहुत खर्चा होता है और इसके सफल होने की संभावना भी बहुत कम होती है इसलिए इसके इलाज के लिए आयुर्वेद को ही सर्वोत्तम माना जाता है,आज हम आपको कुछ ऐसे ही घरेलू आयुर्वेदिक उपाय बताने जा रहे है जिनको अपनाकर आप साइनस के रोग को तुरंत दूर कर सकते हो.
नमक और बेकिंग सोडा का उपयोग
साइनस की समस्या होने पर करीब आधा लीटर पानी में एक चम्‍मच नमक और बेकिंग सोडा मिला लीजिए. अब इस पानी के मिश्रण से नाक को धोए. इससे साइनस की समस्या को आसानी से कम किया जा सकता है.
साइनस के घरेलू आयुर्वेदिक उपाय ( Home Aayurvedic Tips to Cure Sinus ) :
· मेथीदाना ( Fenugreek Seeds ) : साइनस को भागने के लिए आप 1 कप पानी में 1 चम्मच मेथी के दाने डालकर उन्हें अच्छी तरह से उबाल लें. अब आप पानी को ठंडा होने के लिए रख दें और छानकर उसे पी जाएँ. कुछ दिन नियमित रूप से उपाय को अपनाएँ आपको जरुर आराम मिलेगा.
साइनस की समस्या को दूर करने के लिए योग
सूर्य नमस्‍कार
सूर्य नमस्‍कार से अधिकतर रोगों को दूर किया जा सकता है. इससे साइनस की समस्या से भी राहत मिलती है. सूर्य नमस्‍कार को करने के लिए सुबह को उगते हुए सूरज की तरफ मुंह करके करना चाहिए. इससे शरीर में ऊर्जा उतपन्न होती है साथ ही साइनस की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है.

कपालभाति
कपालभाति में श्वास को शक्ति पूर्वक बाहर छोड़ने में ही पूरा ध्यान दिया जाता है. इसमें श्वास को भरने के लिए प्रयत्न नहीं करते क्योकि सहजरूप से जितना श्वास अन्दर चला जाता है. इस प्राणायाम को 5 मिनिट तक अवश्य ही करना चाहिए. प्रणायाम करते समय जब-जब थकान अनुभव हो तब-तब बीच में विश्राम कर लें. प्रारम्भ में पेट या कमर में दर्द हो सकता है. वो धीरे धीरे कम हों जायेगा.
अनुलोम-विलोम
अनुलोम-विलोम को करने से सांस से सम्बंधित बीमारी ठीक करने में मदद मिलती है. साइनस होने पर आप सबसे पहले आप पद्मासन या सुखासन की स्थिति में बैठ जाए. फिर अपने दाएं हाथ के अंगूठे से नाक के दाएं छिद्र को बंद कर लें और बाएं छिद्र से भीतर की ओर सांस खीचें. अब बाएं छिद्र को अंगूठे के बगल वाली दो अंगुलियों से बंद करें. दाएं छिद्र से अंगूठा हटा दें और सांस छोड़ें. अब इसी प्रक्रिया को बाएं छिद्र के साथ दोहराएं. अनुलोम-विलोम को रोजाना करीब 10 मिनट तक करें. इससे साइनस की समस्या से राहत मिलेगी.
अधिक से अधिक मात्रा में पानी पिए. पानी हमारे शरीर के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है. स्वस्थ शरीर के लिए शरीर में उचित मात्रा में पानी होना अनिवार्य है.
प्याज से ईलाज 
प्याज हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में काफी सहायक होता है. यह साइनस की समस्या को आसानी से दूर करता है. रोजाना अपने आहार में प्याज को शामिल करें. इससे साइनस की समस्या को आसानी से दूर किया जा सकता है.
भस्त्रिका अभ्यास विधि
भस्त्रिका आसान को करने के लिए सबसे पहले पद्मासन, सिद्धासन, सुकासन या कुर्सी पर रीढ़, गला व सिर को सीधा कर बैठ जाएं. अब अपने हाथो को घुटनों पर रख कर आंखों को ढीला बन्द कर लीजिए. इसके बाद अपनी नाक से हल्के झटके से सांस अन्दर और बाहर कीजिए. पहले इस क्रिया को धीरे-धीरे करें फिर इसकी क्रिया को बढ़ाते जाए. इस प्राणायाम को 3 से लेकर 5 मिनट तक रोज करे.
गाजर के रस का प्रयोग
गाजर के रस में अनेक पोष्टिक गुण पाये जाते हैं. जिनके द्वारा साइनस की समस्या को आसानी से दूर किया जा सकता है. कुछ समय तक गाजर के रस का सेवन करने से साइनस की समस्या को दूर किया जा सकता है.
गाजर, चुकंदर, खीरे या पालक का रस
एक ग्लास गाजर का रस में चुकंदर, खीरे या पालक के रस मिला कर इसका सेवन करें. कुछ समस्य तक इस मिश्रण के सेवन से साइनस के लक्षणो के उपचार में मदद मिलेगी.
लहसुन का प्रयोग
लहसुन जैसे तीखे खाद्य पदार्थों से साइनस की समस्या से आसानी से राहत मिलती है. इन खाद्य पदार्थों की की कुछ मात्रा ले सकते हैं और उन्हें धीरे – धीरे बढ़ा सकते हैं. अपने नियमित भोजन में लहसुन को शामिल करे. इससे साइनस रोग को दूर किया जा सकता है.
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