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डायबीटीज़ रोग की जानकारी







डायबिटीज पूरी दुनिया के लिए एक चुनौती बनती जा रही है. पिछले 30 सालों में विश्वभर में डायबिटीज के मरीज दुगने हो गए हैं और जिस तेजी से ये बीमारी फैल रही है आशंका है कि 2035 में डायबिटीज के मरीजों की संख्या 60 करोड़ तक पहुंच जाएगी. .
भारत में तेजी से डायबिटीज फैला रहा है पांव
विश्व में सबसे ज्यादा डायबिटीज मरीजों की संख्या चीन में है इसके बाद दूसरे नंबर पर भारत है. लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो जिस तेजी से डायबिटीज के मरीज भारत बढ़ रहे हैं, अगले 4 से 5 सालों में भारत चीन को पीछे छोड़ देगा. आंकड़ें बताते हैं कि भारत में इस समय डायबिटीज के मरीजों की संख्या 6 करोड़ से ज्यादा है. यही नहीं, डायबिटीज की वजह से हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोंक, अंधापन, किडनी फेल के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं.





बच्चे भी डायबिटीज के शिकार
भारत में बच्चों में डायबिटीज का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है. इसके पीछे बड़ी वजह मोटापा, जंक फूड का बढ़ता क्रेज है. साथ ही कम उम्र में सिगरेट, शराब का सेवन बच्चों को डायबिटीज का शिकार बना रहा है. इन सबके बीच सरकार का दावा है कि वो इस बीमारी से बचाव और जागरुकता पर पूरा जोर लगा रही है.
सरकार को जागने की जरूरत
गौरतलब है कि सरकार की ओर से साल 2013 से अब तक नेशनल स्क्रीनिंग ऑफ नन कम्यूनिकेबल डिजीज में डायबिटीज के मरीजों को शामिल किया. इस दौरान 5.9 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की गई और इनमें से 6.5 फीसदी को डायबिटीज थी. इसमें ग्रामीण इलाकों के लोगों में 3.5 फीसदी और शहरी लोगों में 5.9 फीसदी डायबिटीज पाई गई. सबसे ज्यादा चेन्नई, अहमदाबाद, मुंबई और सिक्किम में 9 फीसदी लोग इसके शिकार थे.
*नेशनल हैल्थ की गैर-संक्रामक रोग निवारण योजना की रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि मेरठ में हर दूसरे मरीज पर शुगर का खतरा है। शुगर की बीमारी ने उच्च रक्तचाप को भी पीछे छोड़ दिया है। प्राइवेट अस्पतालों की ओपीडी रिपोर्ट से यह तथ्य साबित हुआ है। गत वर्ष जुलाई से मार्च 15 तक 4527 मरीजों की जांच एवं काउंसिलिंग से बेहद खतरनाक संकेत सामने आये हैं, 2026 मरीजों यानी 45 फीसदी में शुगर पाई गई। उच्च रक्तचाप से ज्यादा हृदयरोगी मिले हैं, जबकि कैंसर की जांच तक शुरु नहीं हो सकी। तमाम मरीजों में कार्डियोवस्कुलर बीमारी एवं स्ट्रोक का भी खतरा मिला है। जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. साधना सिंह के अनुसार महिलाओं में शुगर तेजी से बढ़ रही है ऐसी महिलाओं में प्रसव के दौरान विशेष खतरा होता है। मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर उन्हें शुगर, हृदयरोग एवं स्ट्रोक की ओर ले जा रहे हैं।
मधुमेह को रोकता है मलाई वाला दूध 
लंदन। मलाई रहित दूध को सेहत के लिए बेहतर मानने की धारणा को वैज्ञानिकों ने गलत पाया है। उन्होंने शोध में पाया कि मलाईरहित दूध के मुकाबले मलाईयुक्त दूध स्वास्थ्य के लिए बेहतर हो सकता है। यह डायबिटीज के खतरे को भी काफी कम कर सकता है। अब तक माना जाता रहा है कि मलाईरहित दूध वजन कम रखने और डायबिटीज के खतरे को दूर रखने में सहायक होता है, पर शोधकर्ताओं ने पाया कि पूरी मलाई वाले दूध का सेवन करने वालों का वजन मलाईरहित दूध पीने वालों के मुकाबले सामान्य तौर पर कम रहता है।


उन्होंने यह भी पाया कि मलाईयुक्त दूध पीने वालों में डायबिटीज होने का खतरा भी 46 प्रतिशत कम रहता है। टफ्ट्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कहा कि कई दशकों से आहार सम्बंधी दिशा-निर्देशों में कम वसा वाले डेयरी उत्पादों की सलाह दी जाती रही है, जबकि पूर्ण वसा वाले दूध से बचने की सलाह भी दी जाती रही है। ये दिशा-निर्देश हड्डियों के स्वास्थ्य व दिल के रोगों को ध्यान में रखकर दिये जाते रहे हैं। लेकिन न तो कम वसायुक्त और न ही पूर्ण वसा वाले दूध का दिल की पारम्परिक बीमारी के खतरों से जुड़े कारणों पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव देखा गया है।

          
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