29.1.16

दीर्घायु होने के उपाय :How to Get Longevity




  1.  इजराइल में किए गए एक शोध में सामने आया है कि रोजाना चाय पीने वाले दूसरों के मुकाबले ज्यादा जीते हैं। चाय में पाया जाने वाला एंटीऑक्सीडेंट जिसे पॉलीफिनेल कहते हैं कैंसर, दिल की बीमारियों, बुढ़ापे को दूर रखता है। साथ ही कई सारी बीमारियो से लड़ता है।
  2. कमर की नाप बराबर रखें ना कि वजन पर। वजन कम करने से कुछ नहीं होगा मोटी कमर बीमार करती है।
  3. स्क्रेनटेन, अमेरिका में हुए एक शोध के मुताबिक अखरोट में बीमारियों से लड़ने वाले एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। साथ ही एंटी एजिंग ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो बुढ़ापे को दूर भगाते हैं। इसलिए रोजाना 3 से 4 अखरोट लंबे समय तक जीने का राज है।
  4. शोध में सामने आया है कि रोजाना दो ग्लास सेब का जूस पीने से दिमाग को तंदुरुस्त रखता है।
  5. यूके के एक शोध में सामने आया है कि कम से कम 15 से 20 मिनट धूप में बिना सनस्क्रीन के रहा जाए तो शरीर में विटामिन डी की कमी पूरी हो जाएगी। विटामिन डी की कमी से कैंसर, ऑस्टियोपोरसिस और दिल की बीमारियां हो जाती हैं।
  6. बीच-बीच में कोई ना कोई हेल्थ चेकअप कराते रहें। इसके लिए जरुरी नही है कि बीमार पड़ने पर ही कराएं।
  7. नींद 8 घंटे की पर्याप्त हैं किसी के भी लिए। नींद की कमी ना केवल तनाव बल्कि दिल के कई रोग दे सकता है। इसलिए नींद बहुत ही जरुरी है लंबे समय तक जीने के लिए।
  8. शराब से दूर रहें। ये बुरी आदत जीवन के लिए खतरनाक है।
  9. रात में दांतो को साफ करके सोएं। 10 साल के शोध बताते हैं कि कई सारी बीमारियां जैसे दिल की बीमारियां, कैंसर और डॉयबॉटीज मसूड़ों की बीमारियों से होते हैं।
  10. लंबे समय तक जीना है तो दूसरों की निस्वार्थ मन से लोगों की मदद करें। दूसरों की मदद करने से ना केवल खुशी मिलती है बल्कि तनाव और दुख को भी कम करता है जिससे ऐसे लोग लंबे समय तक जीते हैं।
  11. क जीना है तो सिगरेट बिल्कुल छोड़ दें।
  12. किसी से भी चाहे कोई भी वजह हो झूठ बोलने से बचें।
  13. भरोसा करें, खुद पर, औरों पर और भगवान पर। 1000 से ज्यादा शोध बताते हैं कि लंबे जीवन और विश्वास में गहरा संबंध है। ये तनाव से लड़ने और कई सारी बीमारियों से लड़ने में मदद करता है।
  14. सुनकर जरा चौंकेंगे कि लेकिन शोध में सामने आया है कि एक पैर पर खड़े रहने से लंबे समय तक जी सकते हैं। ये तरीके आपके पैर औक कमर की मांसपेशियों को मजबूत बनाएगी साथ ही बुढ़ापे में हड्डियां टूटने से भी बचाएगी|
  15. फलों को कमरे के तापमान पर रखकर खाएं ना कि फ्रिज में रखें। 
  16. ज्यादा से ज्यादा फल और सब्जियां खाएं।
  17. परिवार के सदस्यों के सेहत का इतिहास पता करें। कई सारी बीमारियां लोगों को उनके परिवार अनुवांशिक रुप से मिलती है। अगर आप अपने परिवार के सेहत का इतिहास पता कर लेंगे तो आपको खुद की कई बीमारियों के बारे में पहले से आभास हो जाएगा और उसका ख्याल रख पाएंगे।
  18. अगर कमर के आसपास ज्यादा चर्बी जाम हो रही है तो ये दस्तक है डॉयबटीज की। महिलाओं की कमर 34 इंच और पुरुषों की कमर 40 इंच से ज्यादा है तो डॉयबटीज का खतरा बढ़ जाता है। बहुत ज्यादा वजन डॉयबटीज को बुलावा देता है।
  19. शोध में सामने आया है कि दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ भावात्मक गहरे रिश्ते बनाना लंबे समय तक जीने का राज है। दोस्तों से जो भावात्मक सहयोग मिलता है उससे तनाव से लड़ने में मदद मिलती है। खुद को प्यार और सहयोग सराबोर देखकर शरीर में डोपामाइन और ऑक्सीटोसिन जैसे केमिकल बनते हैं जो बुढ़ापे को दूर रखते हैं साथ ही दिमाग के विकास में सहयोग करते हैं।
  20. 25 साल की उम्र के बाद आप रात को जितना भी टीवी देखते हैं उससे 20 मिनट आपका जीवन घट जाता है। इसलिए रात को कम टीवी देखें।
  21. दिन में कम से कम 20 बार हंसें।







19.1.16

घर पर ही दर्द नाशक तेल बनाएँ/ Make painkiller oil at home



शरीर के विभिन्न अंगों मे  जब तब दर्द होना गैर मामूली  बात नहीं है| दर्द होने पर लोग आम तौर पर दर्द नाशक गोलियों  का  उपयोग करते   हैं| पेन किलर  उपयोग  के कई साईड इफेक्ट होते हैं|  मेरा तोई सुझाव यह है  कि पेन किलर  खाने की गोलियों  का उपयोग न करना ही  ठीक  है|  दर्द नाशक तेल की मालिश करना ज्यादा बेहतर  विकल्प है| मैं यहाँ  एक बहुत बढ़िया  दर्द निवारक तेल बनाने की विधि लिख देता हूँ | बनाकर इस्तेमाल करें ,लाभ उठावें|




  दर्द नाशक तेल बनाने की विधि-

1) एक काँच की शीशी में 60 ग्राम  तारपीन का तेल  और  25 ग्राम  कपूर डालकर  ढक्कन बंद करें  और इसे धूप मे रख दें| समय समय पर इसे हिलाते भी रहें ताकि  कपूर  भली प्रकार घुल जाये|

2)  एक बर्तन मे  सरसों का तेल 50 ग्राम ,,लहसुन के दो गांठ  छिले  हुए का पेस्ट ,और आधा छोटा  चम्मच  सेंधा नमक   डालकर धीमी आंच पर  पकाएँ कि लहसुन काली पड जाए|  ठंडा कर छानकर एक काँच की शीशी मे भर लें|

3)  तीसरी काँच की शीशी मे अजवायन का सत एक छोटा चमच ,कपूर एक  छोटा चम्मच और पुदीने का सत एक छोटा  चम्मच डालकर रखें और जब तीनों वस्तुएँ भली प्रकार  घुल जाये तो  इसमे एक छोटा चामच नीलगिरी का तेल डालकर अच्छी  तरह हिलाएँ| 

उपरोक्तानुसार तीनों तेल अलग अलग तैयार करें फिर तीनों को एक बोतल मे भरलें | दर्द नाशक मालिश का तेल तैयार है| |यह तेल संधिवात ,कमर दर्द ,गठिया का दर्द के अलावा अन्य शारीरिक दर्दों मे परम हितकारी सिद्ध हुआ है|

5.1.16

पालक के अनेक फायदे Health Benefits of spinach





सर्दियों में सब्जी मार्केट मे पालक की आवक बढ़ जाती है|। हर सब्जी के ठेले पर ये आपको जरूर मिलेगी। पालक मे मौजूद होता है ओमेगा 3, फैटी एसिड और फॉलिक एसिड। ये शरीर में खून का बहाव अच्छा बनाते हैं और धमनियों को बंद नहीं होने देते।
पालक में विटामिन सी और आयरन की मात्रा ज्यादा होती है जो शरीर में मेटाबॉलिजम सुधारता है और शरीर ज्यादा कैलोरी बर्न कर पाता है। यानी पालक खा कर आप वजन भी कम कर सकते हैं।
पालक में कैल्शियम होता है जो दांतों को मजबूत बनाता है। ये दांतों पर से दाग भी हटाता है।
पालक में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को साफ करते हैं और झुर्रियां नहीं पड़ने देते। आप लंबे समय तक जवां दिखते हैं।
यह हरी पत्तेदार सब्जी मर्दों में स्पर्म की गुणवत्ता बढ़ाती है। इसमें फॉलिक एसिड, जिंक, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो स्पर्म के लिए फायदेमंद होते हैं और मर्दानगी भी बढ़ती है। इसलिए मर्दों को पालक जरूर खानी चाहिए।

पालक मधुमेह के मरीजों के लिए बहुत जरूरी बताई जाती है। जिन्हें मधुमेह नहीं होता वो अगर इसका नियमित सेवन करें तो मधुमेह होने का खतरा भी कम हो जाता है।
बढ़ती उम्र के साथ याद्दाश्त कमजोर होने लगती है क्योंकि दिमाग के सेल बिगड़ने लगते हैं। लेकिन अगर चाहते हैं कि याद्दादश्त मजबूत बनी रहे तो पालक का सेवन करना न छोड़ें।




पालक में जो खास एंटीऑस्किसीडेंट होते हैं वो आंखों से जुड़ी कई बीमारियों दूर करते हैं। आयरन, विटामिन ए भी इसमें मदद करते हैं। ये आंखओं की रोशनी बढ़ाते हैं।
अपच दूर करने के लिए पालक से बेहतर क्या हो सकता है। इसमें खूब सारा फाइबर होता है जो शरीर से आसानी से मल को निकलने देता है। जिन्हें कब्ज की ज्यादा शिकायत होती है उन्हें रोज एक गिलाज पालक का जूस पीना चाहिए।








अंगूर खाने के फायदे :Benefits of Grape




  1. अंगूर एक ऐसा फल है जिसे आप साबुत खा सकते हैं। इनसे न तो छिलका उतारने का झंझट और न ही बीज का निकालने का। वैसे स्वास्थ्य के लिहाज से इसके कई फायदे हैं। आमतौर पर अंगूर दो तरह के होते हैं, हल्के हरे रंग के और काले रंग के। लेकिन आकार के आधार पर भी आप इन्हें विभाजित कर सकते हैं। अंगूर को एक विशेष प्रक्रिया के तहत सुखाकर किशमिश का रूप भी दिया जाता है। अंगूर में पर्याप्त मात्रा में कैलोरी, फाइबर और विटामिन सी, ई पाया जाता है।  अंगूर के लाजवाब स्वाद से तो हम सभी परिचित हैं लेकिन कम ही लोगों को पता होता है कि ये सेहत का खजाना भी है।
  2.  अंगूर में ग्लूकोज, मैग्नीशियम और साइट्रिक एसिड जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। कई बीमारियों में राहत के लिए अंगूर का सेवन करना फायदेमंद होता है। टीबी, कैंसर और ब्लड-इंफेक्शन जैसी बीमारियों में ये मुख्य रूप से फायदेमंद होता है।
  3.  खून की कमी को दूर करने के लिए एक गिलास अंगूर के जूस में 2 चम्मच शहद मिलकार पीने से खून की कमी दूर हो जाती है। यह हीमोग्लोबिन को भी बढ़ाता है।
  4.  अगर आपको भूख नहीं लगती है और इस वजह से ही आपका वजन नहीं बढ़ पा रहा है तो भी आप अंगूर के रस का सेवन कर सकते हैं. इसके सेवन से कब्ज की समस्या तो दूर होती ही है, साथ ही भूख भी लगने लग जाती है।
  5.  हाल में हुए एक शोध के अनुसार, ब्रेस्ट कैंसर की रोकथाम में अंगूर का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है। इसके अलावा दिल से जुड़ी बीमारियों के लिए भी ये विशेष रूप से फायदेमंद है। 
  6.  माइग्रेन के दर्द से जूझ रहे लोगों के लिए अंगूर का रस पीना बहुत फायदेमंद होता है. कुछ समय तक अंगूर के रस का नियमित सेवन करने से इस समस्या से निजात पाई जा सकती है। 
  7.  मधुमेह से पीडि़त लोगों के लिए भी अंगूर बेहद फायदेमंद है। ये ब्लड में शुगर के लेवल को कम करने का काम करता है। इसके अलावा ये आयरन का भी एक बेहतरीन माध्यम है। 
  8. अंगूर का सेवन करने से पेट संबंधित रोगों से निजात मिलती है और कब्ज से राहत पाई जा सकती है और उल्टी आने पर अंगूर पर नमक,काली मिर्च लगाकर खाने से उल्टी आना बंद हो जाती है।
  9.  अंगूर का सेवन करने से ब्लड प्रेशर कट्रोल रहता है।- अंगूर का सेवन करने से एनीमिया जैसी बीमारी से राहत पाई जा सकती है। गठिया रोग होने पर भी अंगूर का सेवन करना चाहिए।
  10.  अंगूर का सेवन करना हमारी आंखों के लिए फायदेमंद होता है।
  11.  अंगूर का रोजाना सेवन करने से कैंसर, एपेंडिक्स, बच्चों में कमजोरी, मिर्गी, रक्त संबंधी विकार और कमजोरी में लाभ मिलता है।
  12.  अंगूर का सेवन करने से त्वचा में भी चमक आ जाती है और चेहरे पर होने वाले दाग धब्बों, झुर्रियों से छुटकारा पाया जा सकता है।
  13.  अंगूर में मौजूद शर्करा रक्त में आसानी से अवशोषित हो जाती है और थकान दूर कर शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। 


1.1.16

अकरकरा के गुण और लाभ


भृंगराज कुल का यह झाड़ीदार पौधा पूरे भारत वर्ष में पाया जाता है।आयुर्वेदिक ग्रंथों में खासकर मध्यकालीन ग्रंथों में इसे आकारकरभ नाम से वर्णित किया गया है जिसे हिंदी में अकरकरा भी कहा जाता है।अंग्रेजी में इसी वनस्पति का नाम पेलिटोरी है।इस वनस्पति का प्रयोग ट्रेडीशनल एवं पारंपरिक चिकित्सकों द्वारा दांतों एवं मसूड़े से सम्बंधित समस्याओं को दूर करने हेतु सदियों से किया जाता रहा है|
इस पौधे के सबसे अधिक महत्वपूर्ण भाग इसके फूल एवं जडें हैं।जब इसके फूलों एवं पत्तियों को चबाया जाता है तो यह एक प्रकार से दाँतों एवं मसूड़ों में सुन्नता उत्पन्न करता है।इसके फूल इसके सबसे महत्वपूर्ण भाग हैं।यूँ तो इसे मूल रूप से ब्राजील एवं अफ्रीका से आयी वनस्पति माना जाता है लेकिन यह हर प्रकार के वातावरण चाहे वो उष्णता हो या शीतकालीन में उगने वाली वनस्पति है।इस पौधे की विशेषता इसके फूलों का विशिष्ट आकार है जो कोन यानि शंकु के आकार के होते हैं।पत्तियों का प्रयोग त्वचा रोग में भी किया जाता है।इस वनस्पति में पाया जानेवाला स्पाइलेंथनॉल अपने एनाल्जेसिक एवं एनेस्थेटिक प्रभाव को उत्पन्न करने के लिए जाना जाता है।यह लालास्राव भी उत्पन्न करता है।यह मुखगुहा से ट्रांस्डर्मली अवशोषित होकर एक विशेष प्रकार के ट्रांजेएन्ट रिसेप्टर को स्टिम्युलेट करता है जिस कारण केटेकोलामीन पाथवे प्रभावित होता है और लार उत्पन्न होता है।इस वनस्पति के अन्य लाभकारी प्रभाव भी है जैसे रक्तगत पैरासाइटस को समाप्त करना साथ ही लेयुकोसाटस को बढ़ाना एवं फेगोसायटिक एक्टीविटी को बढ़ाना।इसे इम्युनोमाडुलेटर एवं मलेरिया नाशक के रूप में भी प्रयोग में लाया जाता है।

आयुर्वेद अनुसार यह कफवातजनित व्याधियों में प्रयुक्त होनेवाली प्रमुख औषधि है।पक्षाघात एवं नाडीदौर्बल्य में इसके मूल से तेल सिद्धित कर अभ्यंग का विधान है।इसके मूल के क्वाथ का गण्डूष दंतकृमि,दंतशूल आदि में बेहद लाभकारी होता है।विद्रधि पर इसके मूल या पत्तियों का लेप करने भर मात्र से लाभ मिलता है।

उष्ण वीर्य प्रभाव वाली यह औषधि बल प्रदान करनेवाली साथ ही प्रतिश्याय शोथ एवं वात विकारों में लाभकारी है।

नाड़ी दौर्बल्य जनित विकारों ,ध्वज भंग के साथ प्रीमेच्युर इजेकुलेशन में भी इसका प्रयोग किया जाता है।

इसका प्रमुख योग आकारकरभादि चूर्ण है। उष्ण एवं उत्तेजक होने से इसे वाजीकारक तथा शुक्रस्तम्भक प्रभाव हेतु भी प्रयोग में लाया जाता है।