26.3.16

सरसों के तेल के फायदे






सरसों का तेल हर घर में इस्तेमाल होता है। साथ ही यह तेल प्राचीन समय से आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। कड़वा तेल यानि सरसों के तेल में कई गुण हैं जो आपकी सेहत और उम्र दोनों को बेहद फायदा पहुंचाते हैं। सरसों का तेल दर्दनाशक होता है जो गठिया व कान के दर्द से राहत देता है इसलिए सरसों का तेल किसी औषघि से कम नहीं है।

*सरसों का तेल , सर्दी के दिनों में आपके लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है। यह न केवल आपके शरीर में गर्माहट पैदा करता है बल्कि अपनी तासीर और गुणों के कारण इसका प्रयोग कई तरह की समस्याओं में औषधि‍ के रूप में किया जाता है।
*  सरसों के तेल में विटामिन ए, विटामिन ई, प्रोटीन्स तथा एंटी आक्सीडैंट्स मौजूद होते हैं। ये सारे तत्व इसे बालों के लिए लाभदायक बनाते हैं। बालों के विकास के लिए सरसों का तेल एक उत्प्रेरक के तौर पर काम करता है। इसमें मौजूद विटामिन्स इस बात को यकीनी बनाते हैं कि बालों का विकास तेजी से और सेहतमंद  ढंग से हो और बाल गिरें नहीं। सरसों के तेल से बालों की मालिश एक सुरक्षित तथा प्राकृतिक कंडीशनर के तौर पर काम करती है और इससे बाल सिल्की और सॉफ्ट बनते हैं।यह बालों की जड़ों को पोषण देकर रक्तसंचार बढ़ाता है जिससे बालों का झड़ना बंद हो जाता है। इसमें ओलिक एसिड और लीनोलिक एसिड पाया जाता है, जो बालों की ग्रोथ बढ़ाने के लिए अच्छे होते हैं।
*त्वचा संबंधी समस्याओं में भी बेहद फायदेमंद होता है। यह शरीर के किसी भी भाग में फंगस को बढ़ने से रोकता है और त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाता है।
* सरसों के तेल में एंटी बैक्टीरियल तथा एंटी फंगल गुण मौजूद होते हैं। जब भोजन के माध्यम से सरसों के तेल का सेवन किया जाता है तो यह पाचन प्रणाली के सारे अंगों जैसे पेट, अंतडिय़ों तथा यूरिनरी ट्रैक्ट की इंफैक्शन से हमारा बचाव करता है। इसका इस्तेमाल एंटी बैक्टीरियल तेल के तौर पर भी किया जाता है। फंगल इंफैक्शन से बचने के लिए इसे सीधा त्वचा पर लगाया जा सकता है।




*वजन कम करना-
सरसों के तेल में मौजूद विटामिन जैसे थियामाइन, फोलेट व नियासिन शरीर के मेटाबाल्जिम को बढ़ाते हैं जिससे वजन आसानी से कम होने लगता है।
*मलेरिया में
मलेरिया मच्छरों के काटने से होता है। ऐसे में सरसों का तेल रात को सोने से पहले अपने शरीर पर लगाकर सोएं। इस उपाय से मलेरिया के मच्छर नहीं काटते हैं।
*यदि सरसों के तेल का नियमित आधार पर सेवन किया जाए तो यह माइग्रेन के दर्द से राहत देने में बहुत महत्वपूर्ण साबित होता है। यह भी माना जाता है कि यह पाचक रसों की भी पूर्ति करता है जो हमारे उचित पाचन में सहायक होते हैं। जो लोग खांसी-जुकाम, अस्थमा तथा साइनसाइटिस से पीड़ित होते हैं उनमें सरसों का तेल बहुत ही आरामदायक प्रभाव छोड़ता है।
*भूख नहीं लगने पर भी सरसों का तेल आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। अगर भूख न लगे, तो खाना बनाने में सरसों के तेल का उपयोग करना लाभप्रद होता है। शरीर में पाचन तंत्र को दुरूस्त करने में भी लाभदायक होता है।
*बालों के रंग के लिए
भूरे बालों से परेशान लोगों के लिए सरसों का तेल किसी दवा से कम नहीं है। सरसों का तेल नियमित लगाने से भूरे बाल काले होने लगते हैं। रात को सोने से पहले नियमित सरसों का तेल लगाएं। थोड़े ही दिनों में बालों का रंग काला होने लगेगा।

*दांत दर्द में
यदि दातों में किसी प्रकार का दर्द हो रहा हो तो सरसों के तेल में नमक मिलाकर रगड़ें। आपको राहत मिलेगी। और दांत भी मजबूत बनेगें।

*शरीर की क्षमता को बढ़ाता है

सरसों का तेल शरीर की क्षमता बढ़ाने में एक दवा का काम करता है। शरीर की कमजोरी को दूर करने के लिए और उसकी क्षमता को बढ़ाने के लिए सरसों के तेल की मालिश के बाद नहाने से त्वचा और शरीर दोनों स्वस्थ रहते हैं।सरसों के तेल का नियमित इस्तेमाल करने से कोरोनरी हार्ट डिसीज का खतरा कम होता है। जिन्हें दिल की बीमारी की समस्या हो वे सरसों का तेल खाने में इस्तेमाल करें।इसमें विटामिन ई भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो त्वचा को अल्‍ट्रावाइलेट किरणों और पल्‍यूशन से बचाता है। साथ ही यह झाइयों और झुर्रियों से भी काफी हद तक राहत दिलाने में मदद करता है

*सरसों के तेल की मालिश करने से शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और रक्त संचार भी बेहतर होता है। यह शरीर में गर्माहट पैदा करने में भी मददगार होता है।

*कान दर्द में

कान के दर्द में सरसों का तेल फायदा करता है। जब भी कान में दर्द हो तब गुनगुने सरसों के तेल को कान में टपकाएं।





*गठिया दर्द में

सरसों के तेल में कपूर को पीसकर मिलाएं और फिर इसकी गठिया वाली जगह पर मालिश करें। यह गठिया दर्द में राहत देता है।

*कमर दर्द में

कमर दर्द से छुटकारा पाने के लिए सरसों के तेल में अजवाइन, लहसुन और थोड़ी से हींग को मिलाकर कमर की मालिश करें।

*अस्थमा की रोकथाम
नियमित रूप से अस्थमा से परेशान लोगों को सरसों का तेल खाने में इस्तेमाल करना चाहिए। सरसों के बीज में मैग्नीशियम ज्यादा होता है। इसके अलावा यह तेल सर्दी और ब्रेस्ट में होने वाली परेशानियों को दूर करता है।

*बढ़ती उम्र को रोके
सरसों के तेल में विटामिन ए, सी और के की अधिक मात्रा होती है जो बढ़ती हुई उम्र से होने वाले झुर्रिंयां यानि रिंकल और निशान आदि को दूर करती है। सरसों का तेल एंटीआक्सीडेंट भी होता है। जिससे त्वचा टाइट बनी रहती है।





*कैंसर को रोके
सरसों के तेल में कैंसर को रोकने वाला गुण ग्लुकोजिलोलेट होता है। जो कैंसर के टयूमर व गांठ को शरीर में बनने से रोकता है साथ ही किसी भी तरह के कैंसर को शरीर पर लगने नहीं देता है।

सरसों के तेल को बहुत पौष्टिक माना जाता है, इसलिए इसका प्रयोग खाना बनाने के लिए भी किया जाता है। इसकी तासीर गर्म होने से सर्दियों में यह अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

20.3.16

सेम की फली के फायदे :Benefits of Kidney Beans





सेम को बलोर  भी बोला जाता है| सेम की सब्जी खाई जाती है। यह एक लता है और इसमें फलियां लगती हैं। आयुर्वेद में सेम को कई बीमारियों को ठीक करने की अचूक औषधि बताया गया है।
आयुर्वेद में सेम मधुर, शीतल, भारी, बलकारी, वातकारक, दाहजनक, दीपन तथा पित्त और कफ का नाश करने वाली कही गई हैं।
वात कारक होने से इसे अजवाइन , हींग , अदरक , मेथी पावडर और गरम मसाले के साथ फिल्टर्ड या कच्ची घानी के तेल में बनाए. सब्जी में गाजर मिलाने से भी वात नहीं बनता.|
इसमें लौह तत्व , केल्शियम ,मेग्नेशियम , फोस्फोरस विटामिन ए आदि होते है.
जो लोग दुबलेपन से परेशान हैं वे सेम का सेवन करें।





इसके बीज भी शाक के रूप में खाए जाते हैं। इसकी दाल भी होती है। बीज में प्रोटीन की मात्रा पर्याप्त रहती है। उसी कारण इसमें पौष्टिकता आ जाती है।
सेम और इसकी पत्तियों का साग कब्ज़ दूर करता है|
छोटे बच्चें में बुखार होने पर उनके पैर के तलुओं में सेम की पत्तियों का रस लगाने से बुखार ठीक हो जाता है।
चेहरे के काले धब्बों पर सेम की पत्ती का रस लगाने से लाभ होता है|
सेम एक रक्तशोधक भी है, फुर्ती लाती है, शरीर मोटा करती है।
त्वचा की समस्या किसी भी तरह की हो आप सेम की सब्जी का सेवन करें आपको फायदा मिलेगा।
नाक के मस्सों पर सेम फली रगड़ कर फली को पानी में रखे. जैसे जैसे फली पानी में गलेगी , मस्से भी कम होते जाएंगे|





सेम की सब्जी खून साफ़ करती है और इससे होने वाले त्वचा के रोग ठीक करती है|
शरीर की कमजोरी को दूर करके शरीर को चुस्त और दुरूस्त करता है सेम का सेवन करना।
बिच्छु के डंक पर सेम की पत्ती का रस लगाने से ज़हर फैलता नहीं|
सेम के पत्तों का रस तलवों पर लगाने से बच्चों का बुखार उतरता है|

18.3.16

सिंघाड़े के स्वास्थ्य लाभ : benefits of water chestnut





सिंघाडे को ट्रापा बिसपीनोसा भी कहा जाता है। यह त्रिकोने आकार का फल होता है । यह स्वास्थ के लिए पौष्टिक और विटामिन युक्त फल है। सिंघाडे का प्रयोग कच्चा और पका कर दोनों ही रूपों में किया जाता है। साथ ही सिंघाड़े का आटे का प्रयोग भी किया जाता है। सिंघाडे में विटामिन ए, बी और सी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यह खनिज लवण और कार्बोहाइड्रेट युक्त भी होता है। अब जानते हैं क्या हैं सिंघाड़े में छिपे हुए आयुर्वेदिक गुण जो आपके स्वास्थ को लाभ पहुंचा सकते हैं।

*दिल के आकार से मिलता-जुलता लाल और हरे रंग का सिंघाड़ा पानी में पैदा होता है. यह एक मौसमी फल है और इसमें कई ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो इन दिनों कई तरह की बीमारियों से बचाने में कारगर होते हैं. सिंघाड़े का इस्तेमाल कई तरह किया जाता है. कुछ लोग इसे कच्चा खाना ही पसंद करते हैं और कुछ उबालकर. कई जगहों पर इसे सब्जी के तौर पर भी प्रयोग में लाया जाता है|
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*पानी में उगने वाला सिंघाड़ा सेहत के लिए पौष्टिकता से भरपूर होता है। इतना ही नहीं, यह कई बीमारियों में भी फायदेमंद साबित होता है।

*पानी में पैदा होने वाला तिकोने आकार का फल है सिंघाड़ा। इसके सिर पर सींग की तरह दो कांटे होते हैं, जो छिलके के साथ होते हैं। तालाबों तथा रुके हुए पानी में पैदा होने वाले सिंघाड़े के फूल अगस्त में आ जाते हैं, जो सितम्बर-अक्तूबर में फल का रूप ले लेते हैं। छिलका हटाकर जो बीज पाते हैं, वही कहलाता है सिंघाड़ा। इस जलीय फल को कच्चा खाने में बड़ा मजा आता है। सिंघाड़ा अपने पोषक तत्वों, कुरकुरेपन और अनूठे स्वाद की वजह से खूब पसंद किया जाता है।

*सिंघाड़ा शरीर को ठंडक प्रदान करने का काम करता है. यह प्यास को बुझाने में भी कारगर होता है. दस्त होने पर इसका सेवन करना फायदेमंद रहता है|





*फलाहार में होता है शामिल-
व्रत-उपवास में सिंघाड़े को फलाहार में शामिल किया जाता है। इसके बीज को सुखाकर और पीसकर बनाए गए आटे का सेवन किया जाता है। असल में एक फल होने के कारण इसे अनाज न मान कर फलाहार का दर्जा दिया गया है। यूं तो सिंघाड़े को कच्चा ही खाया जाता है, लेकिन कुछ लोग इसे हल्का उबालकर नमक के साथ खाते हैं। सिंघाड़े से साग-सब्जी और बर्फी, हलवा जैसे मिष्ठान भी बनते हैं, जो अनोखा स्वाद लिए होते हैं।

*इनमें डीटॉक्सि‍फाइंग गुण पाया जाता है. ऐसे में अगर किसी को पीलिया है तो सिंघाड़े का इस्तेमाल उसके लिए बहुत फायदेमंद होगा. यह शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में भी कारगर है|.

*सिंघाड़े का इस्तेमाल रोजाना की डाइट में किया जा सकता है. इनमें उच्च मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं और कम कैलोरी होने के कारण भी यह स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है.|

*सिंघाड़े की बेल को पीसकर उसका पेस्ट, शरीर में जलन वाले स्थान पर लगाने से जलन कम हो जाती है। और लाभ मिलता है।
*यदि मांसपेशियां कमजोर हैं या शरीर में दुर्बलता हो तो आप नियमित सिंघाड़े का सेवन करें एैसा करने से शरीर की दुर्बलता और कमजोरी दूर होती है।

*जिन महिलाओं को मूत्र संबंधी रोग है वें सिंघाड़े का आटा ठंडे पानी में लें।

*सिंघाड़ा पित्त और कफ को खत्म करता है। इसलिए सिंघाड़े का नियमित सेवन करना चाहिए।

*गले से सबंधी बीमारियों के लिए सिंघाड़ा बहुत ही लाभदायक है। गला खराब होने पर या गला बैठने पर आप सिंघाड़े के आटे में दूध मिलाकर पीयें इससे जल्दी ही लाभ मिलेगा। गले में टांसिल होने पर सिंघाड़ा का सेवन करना न भूलें।

*पौष्टिकता से भरपूर-

सिंघाड़े में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन बी व सी, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस जैसे मिनरल्स, रायबोफ्लेबिन जैसे तत्व पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं। आयुर्वेद में कहा गया है कि सिंघाड़े में भैंस के दूध की तुलना में 22 प्रतिशत अधिक खनिज लवण और क्षार तत्व पाए जाते हैं। वैज्ञानिकों ने तो अमृत तुल्य बताते हुए इसे ताकतवर और पौष्टिक तत्वों का खजाना बताया है। इस फल में कई औषधीय गुण हैं, जिनसे शुगर, अल्सर, हृदय रोग, गठिया जैसे रोगों से बचाव हो सकता है। बुजुर्गों व गर्भवती महिलाओं के लिए तो यह काफी गुणकारी है।
*ऊर्जा का अच्छा स्रोत
सिंघाड़े में कार्बोहाइड्रेट काफी मात्र में होता है। 100 ग्राम सिंघाडे में 115 कैलोरी होती हैं, जो कम भूख में पर्याप्त भोजन का काम करता है।

*थायरॉयड और घेंघा रोग में लाभदायक-

सिंघाड़े में मौजूद आयोडीन, मैग्नीज जैसे मिनरल्स घेंघा रोग की रोकथाम में अहम भूमिका निभाते हैं।
*सिंघाड़े में आयोडीन और मैगनीज जैसे कई प्रमुख मिनरल्स होते हैं जो थॉयरॉइड ग्लैंड की सक्रियता को बूस्ट करने का काम करते हैं.

*जो लोग अस्थमा के रोगी हैं उनके लिए सिंघाड़ा वरदान से कम नहीं है। अस्थमा के रोगीयों को 1 चम्मच सिंघाड़े के आटे को ठंडे पानी में मिलाकर सेवन करना चाहिए। एैसा नियमित करने से अस्थमा रोग में लाभ मिलता है।

*बवासीर के रोग में सिंघाड़े के सेवन से लाभ मिलता है। यदि सूखे या खूनी बवासीर हो तो आप नियमित सिंघाड़े का सेवन करें। जल्द ही बवासीर में कमी आयेगी और रक्त आना बंद हो जाएगा।
*वे महिलाएं जिनका गर्भाशय कमजोर हो वे सिंघाड़े का या सिंघाडे़ का हल्वे का सेवन नियमित करती रहें। लाभ मिलेगा।

*दूर करे गले की खराश-

सिंघाड़े में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व गले की खराश और कफ कम करने में प्रभावी रूप से फायदेमंद होते हैं। खांसी के लिए यह टॉनिक का काम करता है।

*टॉन्सिल का इलाज

इसमें मौजूद आयोडीन गले में होने वाले टॉन्सिल के इलाज में लाभदायक है। इसमें ताजा फल या चूर्ण खाना दोनों फायदेमंद होता है। सिंघाड़े को पानी में उबाल कर कुल्ला करने से भी आराम मिलता है।

*गर्भवती महिलाओं के लिए वरदान

गर्भाशय की दुर्बलता व पित्त की अधिकता से गर्भावस्था पूरी होने से पहले ही जिन स्त्रियों का गर्भपात हो जाता है, उन्हें सिंघाड़ा खाने से लाभ होता है। इसके सेवन से भ्रूण को पोषण मिलता है और वह स्थिर रहता है। सात महीने की गर्भवती महिला को दूध के साथ या सिंघाड़े के आटे का हलवा खाने से लाभ मिलता है। सिंघाड़े के नियमित और उपयुक्त मात्र में सेवन से गर्भस्थ शिशु स्वस्थ व सुंदर होता है।

*सिंघाड़ा पित्त और कफ को खत्म करता है। इसलिए सिंघाड़े का नियमित सेवन करना चाहिए।
*गले से सबंधी बीमारियों के लिए सिंघाड़ा बहुत ही लाभदायक है। गला खराब होने पर या गला बैठने पर आप सिंघाड़े के आटे में दूध मिलाकर पीयें इससे जल्दी ही लाभ मिलेगा। गले में टांसिल होने पर सिंघाड़ा का सेवन करना न भूलें।

*सिंघाडे़ में आयोडीन की प्रर्याप्त मात्रा होने की वजह से यह घेघां रोग में फायदा करता है।

*आखों की रोशनी को बढ़ाने में भी सिंघाडा फायदा करता है क्योंकि इसमें विटामिन ए सही मात्रा में पाया जाता है।

*यौन दुर्बलता को दूर करता है|

यह यौन दुर्बलता को भी दूर करता है। 2-3 चम्मच सिंघाड़े का आटा खाकर गुनगुना दूध पीने से वीर्य में बढ़ोतरी होती है।





*सूजन और दर्द में राहत-
सिंघाड़ा सूजन और दर्द में मरहम का काम करता है। शरीर के किसी भी अंग में सूजन होने पर सिंघाड़े के छिलके को पीस कर लगाने से आराम मिलता है। यह एंटीऑक्सीडेंट का भी अच्छा स्रोत है। यह त्वचा की झुर्रियां कम करने में मदद करता है। यह सूर्य की पराबैंगनी किरणों से त्वचा की रक्षा करता है।
* इसमें पॉलीफेनॉलिक और फ्लेवोनॉयड एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. इसके अलावा ये एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल और एंटी-कैंसर गुणों से भी भरपूर होता है. साथ ही यह अनिद्रा की समस्या को दूर करने में भी सहायक होता है|
*बालों का संरक्षक
बाल झड़ने की समस्या आम है। सिंघाड़े में मौजूद निमैनिक और लॉरिक जैसे एसिड बालों को नुकसान पहुंचने से बचाते हैं।
*फटी एड़ियों से छुटकारा
एड़ियां फटने की समस्या शरीर में मैग्नीज की कमी के कारण होती है। सिंघाड़ा ऐसा फल है, जिसमें पोषक तत्वों से मैग्नीज ग्रहण करने की क्षमता होती है। सिंघाड़े के नियमित सेवन से शरीर में मैग्नीज की कमी नहीं हो पाती और शरीर हेल्दी बनता है।
*वजन बढ़ाने में सहायक
सिंघाड़े के पाउडर में मौजूद स्टार्च पतले लोगों के लिए वरदान साबित होती है। इसके नियमित सेवन से शरीर मोटा और शक्तिशाली बनता है।
*बुखार व घबराहट में फायदेमंद
*रोज 10-20 ग्राम सिंघाड़े के रस का सेवन करने से आराम मिलता है।
*मूत्र संबंधी बीमारियों के इलाज में यह सहायक है।
पेशाब में जलन, रुक-रुक कर पेशाब आना जैसी बीमारियों में सिंघाड़े का सेवन लाभदायक है।
*नाक से नकसीर यानी खून बहने पर सिघाड़े के सेवन से फायदा होता है। यह नाक से बहने वाले नकसीर को बंद कर देता है।
*प्रसव होने के बाद महिलाओं में कमजोरी आ जाती है। इस कमजोरी को दूर करने के लिए महिलाओं को सिंघाड़े का हलवा खाना चाहिए यह शरीर में होने वाली कमजोरी को दूर करता है।





*कैल्शियम की सही मात्रा की वजह से सिंघाड़ा हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाता है।
* सिंघाड़े के इस्तेमाल से पुरूषों के वीर्य में बढ़ोत्तरी होती है। साथ यह काम की क्षमता को भी बढ़ता है। इसका प्रयोग आप सिंघाड़े के हलवे के रूप में भी कर सकते हैं। अथवा दूध में दो चम्मच सिंघाड़े का आटा मिलाकर भी प्रयोग कर सकते हैं।
*सिंघाड़ा कोई साधारण फल नहीं है इसमें छिपे हैं कई गुण जो आपके शरीर और स्वास्थ दोनों के लिए लाभदायक हैं। सिंघाड़े के ये गुण शायद अभी तक आपको नहीं मालूम थे। अब नियमित रूप से इसका सेवन करें ताकी आप और आपका परिवार स्वस्थ जीवन जी सके।
*दाद खुजली का इलाज
नींबू के रस में सूखे सिंघाड़े को पीसकर नियमित रूप से लगाने पर दाद-खुजली ठीक हो जाती है।

*नकसीर होने पर राहत
जिन लोगों की नाक से खून आता है, उन्हें बरसात के मौसम के बाद कच्चे सिंघाड़े खाना फायदेमंद है।

*खाने में सावधानियां
एक स्वस्थ व्यक्ति को रोजाना 5-10 ग्राम ताजे सिंघाड़े खाने चाहिए। पाचन प्रणाली के लिहाज से सिंघाड़ा भारी होता है, इसलिए ज्यादा खाना नुकसानदायक भी हो सकता है। पेट में भारीपन व गैस बनने की शिकायत हो सकती है। सिंघाड़ा खाकर तुरंत पानी न पिएं। इससे पेट में दर्द हो सकता|

16.3.16

केसर के फायदे : Benefits of saffron





केसर एक अत्युत्तम  औषधि  है। आयुर्वेद शास्त्र के अनुसार रोजाना थोड़ी मात्रा में केसर लेने से शरीर में कई प्रकार के रोग नहीं होते हैं। इसका स्वभाव गर्म होता है। इसलिए औषधि के रूप में 250 मिलिग्राम व खाद्य के रूप में 100 मिलिग्राम से अधिक मात्रा में इसके सेवन की सलाह नहीं दी जाती।

यह एक कामशक्ति बढ़ाने वाला रसायन है। महिलाओं की कुछ बीमारियों में यह रामबाण साबित होता है। बच्चे के जन्म के बाद गर्भाशय की सफाई के लिए कुछ दिनों तक इसका नियमित सेवन करना बहुत अच्छा रहता है। माहवारी के दौरान दर्द, अनियमितता व गड़बड़ी से निजात के लिए यह एक अच्छी औषधि है। मासिक धर्म साफ लाने वाली, गर्भाशय व योनि संकोचन जैसे रोगों को भी दूर करती है।

केसर त्वचा को सुंदर व निखरा बनाती है। यह शरीर को मजबूत बनाती है। लो ब्लडप्रेशर में ये एक बेहतरीन दवा है। अगर ज्यादा सर्दी-खांसी हो रही हो तो केसर दी जाती है क्योंकि ये कफ का नाश करने वाली औषधि है। मन को प्रसन्न करने वाली रंगीन और सुगन्धित करने वाली होती है। 






अगर सर्दी लग गई हो तो रात्रि में एक गिलास दूध में एक चुटकी केसर और एक चम्मच शहद डालकर यदि मरीज को पिलाया जाए तो उसे अच्छी नींद आती है। त्वचा रोग होने पर खरोंच और जख्मों पर केसर लगाने से जख्म जल्दी भरते हैं।

शिशुओं को अगर सर्दी जकड़ ले और नाक बंद हो जाये तो मां के दूध में केसर मिलाकर उसके माथे और नाक पर मला जाये तो सर्दी का प्रकोप कम होता है और उसे आराम मिलता है।
गंजे लोगों के लिए तो यह संजीवनी बूटी की तरह कारगर है।

जिनके बाल बीच से उड़ जाते हैं, उन्हें थोड़ी सी मुलहठी को दूध में पीस लेना चाहिए। उसमें चुटकी भर केसर डाल कर उसका पेस्ट बनाकर सोते समय सिर में लगाने से गंजेपन की समस्या दूर होती है।

रूसी की समस्या हो या फिर बाल झड़ रहे हों, ऎसी स्थिति में भी उपरोक्त फार्मूला अपनाना चाहिए। पुरूषों में वीर्य शक्ति बढ़ाने हेतु शहद, बादाम और केसर लेने से फायदा होता है। पेट संबंधित बीमारियों के इलाज में केसर बहुत फायदेमंद है।

बदहजमी, पेट-दर्द व पेट में मरोड़ आदि हाजमे से संबंधित शिकायतों में केसर का सेवन करने से फायदा होता है।सिर दर्द को दूर करने के लिए केसर का उपयोग किया जा सकता है। सिर दर्द होने पर चंदन और केसर को मिलाकर सिर पर इसका लेप लगाने से सिर दर्द में राहत मिलती है।
खाने का स्‍वाद बढ़ाने के साथ-साथ केसर का उपयोग कई तरह के आयुर्वेदिक उपचार में भी किया जाता है। हल्‍के और अपने सुनहरे लाल रंगों के साथ यह पदार्थ कमल की भीनी खुशबू लिए होता है। केसर को संस्‍कृत में कुमकुम के नाम से पुकारा जाता है। भारत में यह केवल जम्मू तथा कश्मीर के सीमित क्षेत्रों में पैदा होती हैं। केसर विश्व का सबसे कीमती पौधा है।
*केसर उपयोग की जाने वाली एक अत्युत्तम दवा है। आयुर्वेद शास्त्र के अनुसार रोजाना थोड़ी मात्रा में केसर लेने से शरीर में कई प्रकार के रोग नहीं होते हैं। इसका स्वभाव गर्म होता है। इसलिए औषधि के रूप में 250 मिलिग्राम व खाद्य के रूप में 100 मिलिग्राम से अधिक मात्रा में इसके सेवन की सलाह नहीं दी जाती।
*यह एक कामशक्ति बढ़ाने वाला रसायन है। महिलाओं की कुछ बीमारियों में यह रामबाण साबित होता है। बच्चे के जन्म के बाद गर्भाशय की सफाई के लिए कुछ दिनों तक इसका नियमित सेवन करना बहुत अच्छा रहता है। माहवारी के दौरान दर्द, अनियमितता व गड़बड़ी से निजात के लिए यह एक अच्छी औषधि है। मासिक धर्म साफ लाने वाली, गर्भाशय व योनि संकोचन जैसे रोगों को भी दूर करती है।
*केसर त्वचा को सुंदर व निखरा बनाती है। यह शरीर को मजबूत बनाती है। लो ब्लडप्रेशर में ये एक बेहतरीन दवा है। अगर ज्यादा सर्दी-खांसी हो रही हो तो केसर दी जाती है क्योंकि ये कफ का नाश करने वाली औषधि है। मन को प्रसन्न करने वाली रंगीन और सुगन्धित करने वाली होती है।
*अगर सर्दी लग गई हो तो रात्रि में एक गिलास दूध में एक चुटकी केसर और एक चम्मच शहद डालकर यदि मरीज को पिलाया जाए तो उसे अच्छी नींद आती है। त्वचा रोग होने पर खरोंच और जख्मों पर केसर लगाने से जख्म जल्दी भरते हैं।
*शिशुओं को अगर सर्दी जकड़ ले और नाक बंद हो जाये तो मां के दूध में केसर मिलाकर उसके माथे और नाक पर मला जाये तो सर्दी का प्रकोप कम होता है और उसे आराम मिलता है।




*गंजे लोगों के लिए तो यह संजीवनी बूटी की तरह कारगर है। जिनके बाल बीच से उड़ जाते हैं, उन्हें थोड़ी सी मुलहठी को दूध में पीस लेना चाहिए। उसमें चुटकी भर केसर डाल कर उसका पेस्ट बनाकर सोते समय सिर में लगाने से गंजेपन की समस्या दूर होती है।
*रूसी की समस्या हो या फिर बाल झड़ रहे हों, ऎसी स्थिति में भी उपरोक्त फार्मूला अपनाना चाहिए। पुरूषों में वीर्य शक्ति बढ़ाने हेतु शहद, बादाम और केसर लेने से फायदा होता है। पेट संबंधित बीमारियों के इलाज में केसर बहुत फायदेमंद है।
*बदहजमी, पेट-दर्द व पेट में मरोड़ आदि हाजमे से संबंधित शिकायतों में केसर का सेवन करने से फायदा होता है।सिर दर्द को दूर करने के लिए केसर का उपयोग किया जा सकता है। सिर दर्द होने पर चंदन और केसर को मिलाकर सिर पर इसका लेप लगाने से सिर दर्द में राहत मिलती है।
*शुद्ध केसर तेज लाल व नारंगी रंग के रेशों की तरह होते हैं। ये 'क्रॉकस सेट्टिवम' नामक पौधे के फूलों की नाजुक पंखुडिय़ां होती हैं। इस पौधे की ऊंचाई 30 सेंटीमीटर (लगभग 1 फीट) से भी कम होती है, जिसकी पत्तियां पतली व लंबी होती हैं। इसके फूल बैंगनी रंग के होते हैं। मादा फूलों के अंदर तेज लाल रंग की दो से ढाई सेंटीमीटर (लगभग 1 ईंच) लंबी तीन पंखुडिय़ां होती हैं। इन पंखुडिय़ों को सावधानी से निकालकर सुखा लिया जाता है और इस प्रकार केसर तैयार हो जाता है।

*शुद्ध केसर काफी महंगा होता है, क्योंकि इसके पौधे की रोपाई से लेकर इसे तैयार करने में काफी मेहनत, देखभाल व धैर्य की जरूरत पड़ती है। इस कार्य में काफी वक्त भी लगता है। खाद्य व औषघि के रूप में इसकी अल्प मात्रा की ही जरूरत रहती है। इसके पौधे दक्षिणी यूरोपीय देशों में बहुतायत में मिलते हैं। स्पेन, इटली, ग्रीस व फ्रांस में इसकी खेती सबसे ज्यादा होती है और इन्हीं देशों से इसे दुनियाभर में निर्यात किया जाता है। भारत में इसकी खेती जम्मू-कश्मीर में की जाती है। फ्रांस व स्पेन से भी इसका निर्यात भारत में होता है।
आयुर्वेद शास्त्र के अनुसार नियमित रूप से, अल्प मात्रा में ग्रहण करने पर यह त्रि-दोषों (वात, पित्त व कफ) से निजात दिलाता है। इसका स्वभाव गर्म होता है। अत: औषधि के रूप में 250 मिलिग्राम व खाद्य के रूप में 100 मिलिग्राम से अधिक मात्रा में इसके सेवन की सलाह नहीं दी जाती। यह एक कामोद्दीपक रसायन है। अत: इसका उपयोग बाजीकरण के लिए भी किया जाता है। कई अन्य बीमारियों के इलाज में भी इसका उपयोग किया जाता है। महिलाओं की कुछ बीमारियों में यह रामबाण साबित होता है। बच्चे के जन्म के बाद गर्भाशय की सफाई के लिए कुछ दिनों तक इसका नियमित सेवन करना बहुत अच्छा रहता है। माहवारी के दौरान दर्द, अनियमितता व गड़बड़ी से निजात के लिए यह एक अच्छी औषधि है।
*सावधानी- केसर खरीदते वक्त यह सुनिश्चित करें वह मिलावटी न हो और उसकी गुणवत्ता अच्छी है। औषधीय उपयोग के लिए कश्मीरी केसर सबसे अच्छा माना जाता है। एक ग्राम केसर लगभग 100 रुपये की आती है। इसे कश्मीर एम्पोरियम या आयुर्वेदिक औषधियों की भरोसेमंद दुकानों से खरीदें व सड़क किनारे स्थित दुकानों से कदापि न लें, क्योंकि यह मिलावट वाली हो सकती है।
*पहचान- केसर की सुगंध बेहद तेज होती है। यहां तक कि यदि इसे प्लास्टिक की दो थैलियों में बंद करके भी रख दिया जाए, तो भी इसकी सुगंध चारों ओर फैल जाती है।
*कुछ खाद्य व औषधीय नुस्खे-
केसर दूध- केसर दूध ठंडा व गर्म दोनों प्रकार से तैयार किया जाता है। जाड़े के दिनों में गर्म व गर्मी के दिनों में ठंडे दूध का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।
*आवश्यक सामग्री- दो लोगों के लिए
दूध- आधा लीटर (ढाई कप), मिश्री या शक्कर- दो चम्मच या स्वाद के अनुसार, केसर- दो सौ मिलिग्राम (एक चुटकी) और कटे हुए बादाम दो चम्मच।
*गर्म दूध के लिए- दूध को गर्म कर लें और इसमें उपरोक्त सभी सामग्री डालकर चम्मच से तब तक मिलाएं, जब तक उसमें केसर पूरी तरह से घुल न जाए। शुद्ध केसर आहिस्ता-आहिस्ता घुलता है और दूध को एकदम से रंगीन नहीं बनाता, जैसा कि सिंथेटिक केसर करते हैं।
*ठंडे दूध के लिए- थोड़ी सी दूध लेकर इसे गर्म कर लें और इसमें उपरोक्त सभी पदार्थों को अच्छी तरह से घुला लें। अब इसे ठंडा होने दें, फिर शेष दूध मिलाकर फ्रिज में रख दें। आप चाहें तो इसमें बर्फ के कुछ टुकड़े भी डाल सकते हैं, हालांकि इससे दूध का स्वाद कुछ बदल सकता है।




*औषधीय नुस्खा-
आवश्यक सामग्री- केसर 25 ग्राम, घी 50 ग्राम और मिश्री या शक्कर 50 ग्राम
सबसे पहले मिश्री को अच्छी तरह पीस लें। इसके बाद घी को गर्म कर लें और उसमें केसर को डालकर धीरे-धीरे चलाएं। फिर इसमें पीसी मिश्री मिला लें और कुछ देर तक इसे चलाएं। इसके बाद इसे ठंडा होने के लिए छोड़ दें।
खुराक- चौथाई चम्मच गर्म दूध, गर्म पानी या गर्म चाय के साथ सेवन करें। यदि आपकी इच्छा इसके साथ कुछ पीने का न हो, तो इसका सेवन ऐसे भी कर सकते हैं,

*चिंता दूर करे केसर में कुछ क्रियाशील तत्व पाए जाते हैं जिससे दिमाग में डिप्रेशन नहीं पैदा होता। यह दिमाग को शांत करती है और चिंता को दूर भगाती है। पेट के लिये इसे भोजन या दूध में लेने से पाचन क्रिया बेहतरीन होती है।

*खूबसूरत त्‍वचा पुराने जमाने से ही हमारी दादी-नानी खूबसूरत त्‍वचा पाने के लिये केसर का प्रयोग किया करती थीं। केसर ना केवल चेहरे से दाग-धब्‍बे हटा कर चहरे को चमकदार बनाता है बल्‍कि यह आयुर्वेदिक तेल में भी प्रयोग किया जाता है। चेहरे के दाग हटाने के लिये पानी और केसर को मिश्रण कर के चेहरे पर लगाएं। गोरा बनाएं इस पेस पैक को बनाने के लिये एक चुटकी केसर, दूध और जैतून का तेल मिश्रण कर के चेहरे पर लगाइये। जब पैक सूख जाए तब इसे स्क्रब कर के साफ कर लीजिये और चेहरा धो लीजिये।

*मूत्र विकार यह एक मूत्रवर्धक औषधी भी है। घर पर रात को पानी में थोड़ी सी केसर भिगो कर सुबह उसे शहद या चीनी के साथ सेवन करें। इससे मूत्र विकार दूर होगा।

*दिमाग बनाए तेज केसर दिमाग और नाड़ीमंडल के लिये किसी वरदान से कम नहीं। रोज रात को सोने से पहले दूध में केसर के कुछ रेशे डालना ना भूलें। बीमारियां भगाए केसर में रासायनिक घटकों की मौजूदगी की वहज से इसे भोजन में प्रयोग करने से बीमारियों से छुटकारा मिलता है। इसमें कैल्‍शियम, विटामिन और प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है जिससे पूरा शरीर निरोग रहता है।

15.3.16

छाछ के फायदे Benefits of Buttermilk





कहा जाता है कि छाछ धरती का अमृत है। यह शरीर की बीमारियों को दूर भगाता है। बाजार में बिकने वाले महंगे शीतल पेयों से छाछ लाख गुना अच्छी है। इसके कई फायदे हैं। मट्ठे का प्रयोग कई तरह से किया जा सकता है गर्मियों में रोजाना छाछ का सेवन अमृत के समान है। इसमें कैलोरी और फैट कम होता है। छाछ के ढेरों फायदे हैं-
*छाछ को भोजन के साथ लेना हितकारी होता है। यह आसानी से पचने वाला पेय है।
*ताजे दही से बनी छाछ का प्रयोग ज्यादा लाभकारी होता है। छाछ से पेट का भारीपन, आफरा, भूख न लगना, अपच व पेट की जलन की शिकायत दूर होती है।पैर की एड़ियों के फटने पर मट्ठे का ताजा मक्खन लगाने से आराम मिलता है।
*अत्यधिक मानसिक तनाव होने पर छाछ का सेवन लाभकारी होता है।
*जले हुए स्थान पर तुरंत छाछ या मट्ठा मलना चाहिए।
*सिर के बाल झड़ने पर बासी छाछ से सप्ताह में दो दिन बालों को धोना चाहिए।
*मोटापा अधिक होने पर छाछ को छौंककर सेंधा नमक डालकर पीना चाहिए।





*सुबह-शाम मट्ठा या दही की पतली लस्सी पीने से स्मरण शक्ति तेज होती है।
*उच्च रक्तचाप होने पर गिलोय का चूर्ण मट्ठे के साथ लेना चाहिए।
*छाछ का नियमित इस्तेमाल करते रहने से बवासीर, मूत्र विकार, प्यास लगना और त्वचा संबंधी बीमारियों में लाभ होता है।गर्मी के कारण अगर दस्त हो रही हो तो बरगद की जटा को पीसकर और छानकर छाछ में मिलाकर पीएं।
* छाछ में मिश्री, काली मिर्च और सेंधा नमक मिलाकर रोजाना पीने से एसिडिटी जड़ से साफ हो जाती है।
*विषैले जीव-जंतु के काटने पर मट्ठे में तम्बाकू मिलाकर लगाना चाहिए।
*कहा जाता है किसी ने जहर खा लिया हो तो उसे बार-बार फीका मट्ठा पिलाना चाहिए। परंतु डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
*अमलतास के पत्ते छाछ में पीस लें और शरीर पर मलें। कुछ देर बाद स्नान करें। शरीर की खुजली नष्ट हो जाती है।
*हिचकी चलने पर मट्ठे में एक चम्मच सौंठ डालकर सेवन करें।
*उल्टी होने पर मट्ठे के साथ जायफल घिसकर चाटें।
*गर्मी में रोजाना दो समय पतला मट्ठा लेकर उसमें भूना जीरा मिलाकर पीने से गर्मी से राहत मिलती है।
*मट्ठे में आटा मिलाकर लेप करने से झुर्रियाँ कम पड़ती हैं।





*कहा जाता है कि मुंहासे होने पर गुलाब की जड़ मट्ठे में पीसकर मुंह पर लगानी चाहिए।
*इसमें स्वास्थ्यकारी जीवाणु और कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं साथ ही लेक्टोज़ शरीर में आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। अगर कब्ज की शिकायत बनी रहती हो तो अजवाइन मिलाकर छाछ पीएं।  यह पौषक तत्वों जैसे लोहा, जस्ता, फास्फोरस और पोटेशियम से भरी होती है।
*खाना हजम न होने पर भुना हुआ जीरा, कालीमिर्च का चूर्ण और सेंधा नमक छाछ में मिलाकर घूंट-घूंट कर पीने से खाना जल्दी पचता है। कमरदर्द, जोड़ों का दर्द व गठिया आदि में भी छाछ का प्रयोग विशेषज्ञ की सलाह से कर सकते हैं।
*पीलिया रोग में एक कप छाछ में 10 ग्राम हल्दी मिलाकर दिन में तीन-चार बार लेने से फायदा होता है।

11.3.16

वजन कम करने के उपाय




कुछ घरेलू नुस्खे इस्तेमाल कर आप जल्दी वजन नियंत्रित कर सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही घरेलू और कारगर वजन घटान के नुस्खों के बारे में-

लौकी- सब्जियों में लौकी बहुत कम लोगों की पसंद है, लेकिन जिन लोगों को वजन कम करना है उनके लिए यह बेहद लाभकारी है| लौकी में फाइबर की मात्रा का अधिक होना अैर फैट नहीं होना इसकी खूबी है। और यही खूबी वजन कम करने में सहायता करती है। लौकी में 96 प्रतिशत पानी और 12 कैलोरी होती है। इसलिए इसे खाने से कम कैलोरी शरीर में जाती है और मोटापा छू हो जाता है।

साथ ही खीरा भी आप अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं क्योंकि इसमें भी पानी की मात्रा अधिक पाई जाती है। खीरे में 90 प्रतिशत पानी होता है। यह शरीर की वसा को कम करता है।





नारियल पानी - प्रकृति का सबसे अनूठा ड्रिंक है नारियल पानी। यह हमारे मैटाबॉलिज्म को मजबूत करता है और इलेक्ट्रोलाईट्स से भरा होता है। अल्सर और पेट की समस्याओं के अलावा वजन घटाने में भी यह कारगर है। शरीर मे उत्पन्न होने वाले विजातीय पदार्थों को भी नारियल पानी बाहर निकाल देता है। रोजाना एक से दो ग्लास नारियल पानी आपके शरीर में जबरदस्त बदलाव ला सकता है।

ब्लैक कॉफी और ग्रीन टी - रिसर्च बताते हैं कि ग्रीन टी और ब्लैक कॉफी पीने से मोटापा कम होता है। हालांकि ब्लैक कॉफी को फायदेमंद बनाने के लिए इसमें शक्कर नहीं मिलानी चाहिए। इसे पीन से कुछ ही हफ्तों में वजन कम किया जा सकता है।

ग्रीन टी पीने से भी मोटापे को कम किया जा सकता है। रिसर्चकर्ताओं के मुताबिक ग्रीन टी मैटाबॉलिज्म को बढ़ाता है और इसमें एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसी के चलते वजन कम करने के लिए ग्रीन टी उपयोग करने की सलाह दी जाती है।




खूब पानी पीएं - पानी भी मोटापा घटाने में सहायक होता है। अगर आप खूब पानी पिते हैं तो इससे कैलोरी बर्न करने में मदद मिलती है और यह शरीर में मौजूद टॉक्सिन को मूत्र के माध्यम से बाहर निकाल देता है। ध्यान रखें खाने के ठीक बाद ज्यादा पानी नहीं पिएं।

ये सब्जियां भी असरकारक- लौकी के अलावा और भी ऐसी सब्जियां हैं जो मोटापे की दुश्मन कही जाती हैं। इनमें गोभी, गाजर और टमाटर शामिल हैं। मोटापा कम करने के लिए इन सब्जियों को अपनी डाइट में शामिल करें

6.3.16

नजर तेज करने के उपाय




प्रकृति का खूबसूरत तोहफा है आँखें। आँख है तो दुनिया रंगीन है, वरना चारों ओर अंधेरा है, इसलिए आँख की सुरक्षा भी जरूरी है, खास कर उन लोगों के लिए, जिन्हें कम नजर आता है या चश्मा लगाना पड़ता है।यदि हम जीवन जीने की शैली को कुछ बदल लें तथा अच्छे उपाय करें तो नजर की कमजोरी ठीक कर सकते हैं।
यहाँ दिए जा रहे उपायों से आप आँखों की सुरक्षा कुछ हद तक कर सकते हैं। निरंतर बगैर नागा किए निम्नलिखित उपाय करें तो हो सकता है आपका चश्मा छूट जाए। यह सब नियम पालन पर निर्भर है।
घरेलू चिकित्सा द्वारा उपचार
*200 ग्राम बादाम गिरि, 200 ग्राम सौंफ, 20 ग्राम दक्षिणी मिर्च (सफेद मिर्च) पीसकर 50 ग्राम घी में अच्छी तरह रगड़ लें तथा 400 ग्राम मिश्री पीसकर मिला लें। 2-2 चम्मच दवा गाय दूध के साथ सुबह-शाम 3-4 माह सेवन करने से नजर में इजाफा होता है। साथ में ऊपर बताए अन्य उपाय भी करें।
**गोरखमुंडी का अर्क 25-30 मिली नित्य प्रात: कुछ दिन सेवन करने से नजर बढ़ती है।




एक हल्दी की गांठ को नीबू में छेदकरके अन्दर रख दें। जब 8-10 दिन में नीबू सूख जाए तो फिर दूसरे नींबू में अन्दर रख दें। यह प्रक्रिया 3 बार करें। अर्थात् एक महीने बाद उस गांठ को गुलाब जल की कुछ बूंदें पत्थर में डालकर घिसकर अंजन की तरह आंख में लगाएं। कुछ दिन लगाने से आंख की रोशनी में फायदा होगा।
*100-100 ग्राम अश्वगन्धा चूर्ण, आंवला चूर्ण तथा मुलैठी चूर्ण मिलाकर रख लें। 4-5 ग्राम दवा रोज प्रात: सायं दूध के साथ 2-3 माह लेने से आंखों की कमजोरी में लाभ होता है।
*सुबह सूर्योदय से पहले उठें और उठते ही मुँह में पानी भरकर बंद आँखों पर 20-25 बार ठंडे पानी के छींटे मारें। याद रखें, मुँह पर छींटे मारते समय या चेहरे को पानी से धोते समय मुँह में पानी भरा होना चाहिए।

*धूप, गर्मी या श्रम के प्रभाव से शरीर गर्म हो तो चेहरे पर ठंडा पानी न डालें। थोड़ा विश्राम कर पसीना सुखाकर और शरीर का तापमान सामान्य करके ही चेहरा धोएँ । आँखों को गर्म पानी से नहीं धोना चाहिए।
*नहाने से पूर्व मुख में पानी भरकर और आंखें खोलकर साफ पानी से छीटें मारें या बाल्टी में साफ पानी भर कर चेहरे को थोड़ा पानी में डुबाकर पानी में आंखें 10-15 बार खोलें व बन्द करें।
* रोज प्रात: हल्के गुनगुने पानी में थोड़ा सा नमक डालकर टोटीदार लोटे से दोनों नथुनों से जलनेति क्रम से करें, फिर घी या सरसों का तेल लगा लें।
रात्रि में 2-3 ग्राम त्रिफला चूर्ण 20-25 मि.ली साफ पानी में मिलाकर कांच के गिलास में ढक कर रख दें। प्रात: पानी निथारकर छानकर एक बर्तन में रख लें। उसमें आंख डुबोकर बार-बार खोलें व बन्द करें। (30-40 बार)
*बहुत दूर के पदार्थों या दृश्यों को देर तक नजर गड़ाकर न देखें, तेज धूप से चमकते दृश्य को न देखें, कम रोशनी में लिखना, पढ़ना व बारीक काम न करें। नींद आ रही हो, आँखों में भारीपन, जलन या थकान महसूस हो तो काम तत्काल बंद कर थोड़ा विश्राम कर लें।
*देर रात तक जागना और सूर्योदय के बाद देर तक सोना आँखों के लिए हानिकारक होता है। देर रात तक जागना ही पड़े तो घंटा-आधा घंटे में एक गिलास ठंडा पानी पी लेना चाहिए। सुबह देर तक सोकर उठें तो उठने के बाद मुँह में पानी भरकर, आँखों पर ठंडे पानी से 20-25 छींटे जरूर मारें।
*आँखों को धूल, धुआँ, धूप और तेज हवा से बचाना चाहिए। ऐसे वातावरण में ज्यादा देर न ठहरें। लगातार आँखों से काम ले रहे हों तो बीच में 1-2 बार आँखें बंद कर, आँखों पर हथेलियाँ हलके हलके दबाव के साथ रखकर आँखों को आराम देते रहें।
*रोज प्रात: खाली पेट दोनों हाथों की तर्जनी व मध्यमा उंगली के नीचे जड़ पर तथा पैर की इन्हीं दो उंगलियों के नीचे आधा से एक मिनट क्रम में तीन बार दबाव देकर एक्यूप्रेशर चिकित्सा करें।
*दिन में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।




*प्रात:-सायं भस्त्रिका, अनुलोम विलोम, कपालभांति और भ्रामरी प्राणायाम करें।
*रोज प्रात: योगासान करें या पूरे शरीर का व्यायाम करें।
*खाना हल्का सुपाच्य एवं शाकाहारी करें।
*आंखों को धूल, मिट्टी, धुंआ, प्रदूषण, गन्दा पानी, अधिक धूप, अधिक ठंड आदि से बचाएं।
*यात्रा करते समय, बस, रेलगाड़ी व अन्य वाहनों में चलते-चलते कुछ न पढ़ें।
*अधिक रात्रि जागरण न करें, अधिक अंग्रेजी दवाएं सेवन न करें।
*तेज रफ्तार की सवारी करने पर हवा से आँखों को बचाएँ। अधोवायु, मल-मूत्र, छींक और तनाव अधिक देर तक लगातार रोना, अत्यधिक शोक संतृप्त रहना आदि नेत्रों को हानि पहुँचाने वाले काम हैं। इनसे बचने की भरपूर कोशिश करनी चाहिए। आँखें सबसे कोमल और संवेदनशील अंग हैं अतः जरा से गलत आचरण का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव आँखों पर ही पड़ता है यह तथ्य याद रखना चाहिए।

4.3.16

चने खाने के फायदे Benefits of Horse gram





आयुर्वेद में चने की दाल और चने को शरीर के लिए स्वास्थवर्धक बताया गया है। चने के सेवने से कई रोग ठीक हो जाते हैं। क्योंकि इसमें प्रोटीन, नमी, कार्बोहाइड्रेट, आयरन, कैल्शियम और विटामिन्स पाये जाते हैं। चना दूसरी दालों के मुकाबले सस्ता होता है और सेहत के लिए भी यह दूसरी दालों से पौष्टिक आहार है। चना शरीर को बीमारियों से लड़ने में सक्षम बनाता है। साथ ही यह दिमाग को तेज और चेहरे को सुंदर बनाता है। चने के सबसे अधिक फायदे इन्हे अंकुरित करके खाने से होते है।





सुबह खाली पेट चने से मिलते है कई फायदे-
1)सर्दियों में चने के आटे का हलवा अस्थमा में फायदेमंद होता है।



2) चने के आटे की नमक रहित रोटी 40 से 60 दिनों तक खाने से त्वचा संबंधित बीमारियां जैसे-दाद, खाज, खुजली आदि नहीं होती हैं।
3) भुने हुए चने रात में सोते समय चबाकर गर्म दूध पीने से सांस नली के अनेक रोग व कफ दूर हो जाता हैं।
4) शहद मिलाकर पीने से नपुंसकता समाप्त हो जाती है।
5) पीलिया में चने की दाल खाना फायदेमंद रहता है|
6) चीनी के बर्तन में रात को चने भिगोकर रख दे। सुबह उठकर खूब चबा-चबाकर खाएं इसके लगातार सेवन करने से वीर्य में बढ़ोतरी होती है व पुरुषों की कमजोरी से जुड़ी समस्याएं खत्म हो जाती हैं। भीगे हुए चने खाकर दूध पीते रहने से वीर्य का पतलापन दूर हो जाता है।
7) पीलिया की बीमारी में चने की 100 ग्राम दाल में दो गिलास पानी डालकर अच्छे से चनों को कुछ घंटों के लिए भिगो लें और दाल से पानी को अलग कर लें अब उस दाल में 100 ग्राम गुड़ मिलाकर 4 से 5 दिन तक रोगी को देते रहें। पीलिया से लाभ जरूरी मिलेगा।


7) बार-बार पेशाब जाने की बीमारी में भुने हूए चनों का सेवन करना चाहिए। गुड़ व चना खाने से भी मूत्र से संबंधित समस्या में राहत मिलती है।
8) रोजाना भुने चनों के सेवन से बवासीर ठीक हो जाता है।
9) दस ग्राम चने की भीगी दाल और 10 ग्राम शक्कर दोनों मिलाकर 40 दिनों तक खाने से धातु पुष्ट हो जाती है।
10) 25 ग्राम काले चने रात में भिगोकर सुबह खाली पेट सेवन करने से डायबिटीज दूर हो जाती है।
11) रातभर भिगे हुए चनों से पानी को अलग कर उसमें अदरक, जीरा और नमक को मिक्स कर खाने से कब्ज और पेट दर्द से राहत मिलती है।
12) गर्म चने रूमाल या किसी साफ कपड़े में बांधकर सूंघने से जुकाम ठीक हो जाता है।
13) मोटापा घटाने के लिए रोजाना नाश्ते में चना लें।
14) शरीर की ताकत बढ़ाने के लिए अंकुरित चनों में नींबू, अदरक के टुकड़े, हल्का नमक और काली मिर्च डालकर सुबह नाश्ते में खाएं। आपको पूरे दिन की एनर्जी मिलेगी।
15) चने का सत्तू भी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद औषघि है। शरीर की क्षमता और ताकत को बढ़ाने के लिए गर्मीयों में आप चने के सत्तू में नींबू और नमक मिलकार पी सकते हैं। यह भूख को भी शांत रखता है।
16) गर्भवती को उल्टी हो तो भुने हुए चने का सत्तू पिलाएं।
17) पथरी की समस्या अब आम हो गई है। दूषित पानी और दूषित खाना खाने से पथरी की समस्या बढ़ रही है। गाल ब्लैडर और किड़नी में पथरी की समस्या सबसे अधिक हो रही है। एसे में रातभर भिगोए चनों में थोड़ा शहद मिलाकर रोज सेवन करें। नियमित इन चनों का सेवन करने से पथरी आसानी से निकल जाती है। इसके अलावा आप आटे और चने का सत्तू को मिलाकर बनी रोटियां भी खा सकते हो।
18) चना पाचन शक्ति को संतुलित और दिमागी शक्ति को भी बढ़ाता है। चने से खून साफ होता है जिससे त्वचा निखरती है।
19) अधिक काम और तनाव की वजह से पुरूषों में कमजोरी होने लगती है। एैसे में अंकुरित चना किसी वरदान से कम नहीं है। पुरूषों को अंकुरित चनों को चबा-चबाकर खाने से कई फायदे मिलते हैं। इससे पुरूषों की कमजोरी दूर होती है। भीगे हुए चनों के पानी के साथ शहद मिलाकर पीने से पौरूषत्व बढ़ता है। और नपुंसकता दूर होती है।
20) काला चना शरीर के अंदर की गंदगी को अच्छे से साफ करता है। जिससे डायबिटीज, एनीमिया आदि की परेशानियां दूर होती हैं। और यह बुखार आदि में भी राहत देता है।

3.3.16

प्याज के फायदे ; Benefits of Onion





भोजन के साथ सलाद के रूप में खाया जाने वाला कच्चा प्याज हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है। सैंडविच, सलाद या फिर चाट, प्याज सभी के स्वाद को दोगुना कर देता है। यदि आपको डर है कि प्याज खाने से दुर्गंध आएगी तो खाने के बाद माउथ फ्रेशनर खाइए या ब्रश कर लीजिए, लेकिन प्याज जरूर खाइए। आहार विशेषज्ञों की मानें तो यह यौन दुर्बलता को दूर करने में भी बहुत उपयोगी है। यौन शक्ति के संवर्धन एवं संरक्षण के लिए प्याज एक सस्ता एवं सुलभ विकल्प है।

*अगर आप ये सोचते हैं कि प्याज केवल सब्जी बनाने या फिर सलाद में खाने के लिए ही है तो आपको बता दें कि प्याज किसी औषधि‍ से कम नहीं. कई गंभीर बीमारियों के लिए ये रामबाण नुस्खा है. हालांकि इस बात की जानकारी होना भी जरूरी है कि हम इसका इस्तेमाल कब और किस तरह से करें ताकि भरपूर लाभ मिले.-





*हरा प्याज खाने के कई फायदे हैं। यह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम बनाए रखता है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। एंटी बैक्टीरियल गुण के कारण ही इसे खाने से पाचन में भी सुधार होता है। हरे प्याज में क्रोमियम होता है।

* हरा प्याज खाने से इम्यूनिटी पावर बढ़ता है। हरा प्याज चेहरे की झुर्रियों को दूर करता है। इसे खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है। हरा प्याज मैक्रोन्यूट्रिशयन को बनाए रखता है। हरे प्याज में एंटी-इन्फ्लामेटरी और एंटी- हिस्टामाइन गुण भी होते हैं। इसीलिए यह गठिया और अस्थमा के रोगियों के लिए लाभदायक रहता है।

लू लगने पर
*गर्मियों में लू लग जाना एक आम बात है लेकिन, अगर आप कच्ची प्याज खाती हैं तो आपको लू नहीं लगेगी. लू लगने पर प्याज का रस पीने से फायदा होता है. आपने बड़े-बुजुर्गों को ये कहते भी सुना होगा कि प्याज का टुकड़ा साथ रखने से लू नहीं लगती है.


*झड़ते बालों के लिए फायदेमंद


अगर आपके बाल गिर रहे हैं तो इसमें प्याज का रस बहुत फायदेमंद हो सकता है. साथ ही बालों में प्याज का रस लगाने से बाल चमकदार होते हैं.


*.वीर्यवृद्धि के लिए सफेद प्याज के रस के साथ शहद लेने पर फायदा होता है। सफेद *प्याज का रस, शहद, अदरक का रस और घी का मिश्रण 21 दिनों तक लगातार लेने से नपुंसकता दूर हो जाती है। कफ हो जाने पर प्याज के रस में मिश्री मिलाकर चाटने से फायदा मिलता है। प्याज को पीसकर गुड़ मिलाकर खाने से वीर्य वृद्धि होती है।

* 100 ग्राम अजवाइन को सफेद प्याज के रस में भिगोकर सुखा लें। सूख जाने पर फिर यही प्रक्रिया दोहराएं। ऐसा तीन बार करें। अच्छी तरह सूख जाने पर इसका बारीक पाउडर बना लें। अब इस पाउडर को पांच ग्राम घी और पांच ग्राम शक्कर के साथ सेवन करें। इस योग को इक्कीस दिन तक लेने पर शीघ्रपतन की समस्या से राहत मिलती है। एक किलो प्याज का रस, एक किलो शहद और आधा किलो शक्कर मिलाकर डिब्बे में पैक कर लें। इसे पंद्रह ग्राम की मात्रा में एक माह तक नियमित सेवन करें। इस योग के प्रयोग से सेक्शुअल डिजायर में वृद्धि होती है।





 *एक किलो प्याज के रस में आधा किलो उड़द की काली दाल मिलाकर पीस कर पेस्ट बना लें। इसे सुखाकर एक किलो प्याज के रस में मिलाकर फिर से पीस लें। इस पेस्ट को दस ग्राम मात्रा में लेकर भैंस के दूध में पकाएं और शक्कर डाल कर पी जाएं। इस योग का सेवन तीस दिन तक नियमित सुबह-शाम सेवन करने से कमजोरी दूर होती है और कामेच्छा में बढ़ोतरी होती है।

कब्ज दूर करे-

प्याज में मौजूद रेशे पेट के लिए बेहद फायदेमंद हैं। प्याज खाने से कब्ज दूर हो जाती है। यदि आपको कब्ज की शिकायत है तो कच्चा प्याज रोज खाना शुरू कर दीजिए।

गले की खराश मिटाए

यदि आप सर्दी, कफ या खराश से पीड़ित हैं तो ताजे प्याज का रस पीजिए। इसमें गुड़ या शहद मिलाकर पीना अधिक फायदेमंद होता है।

पेशाब न होने पर

अगर किसी को रुक-रुक कर पेशाब हो रही हो तो पेट पर प्याज के रस की हल्की मालिश करनी चाहिए. प्याज का रस पीने से पेट संबंधी कई बीमारियों में फायदा होता है.

सर्दी-जुकाम में

प्याज की तासीर गर्म होती है. ऐसे में अगर आपको सर्दी हो गई है तो प्याज आपके लिए दवा का काम करेगी . इसके सेवन से बंद नाक और सर्दी में राहत मिलती है.

लंबी उम्र के लिए

प्याज का रस किसी बूटी से कम नहीं. इससे कई तरह की बीमारियां दूर होती हैं इसलिए ये भी कहा जाता है कि प्याज खाने से इंसान की उम्र बढ़ती है
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पथरी रोगी के लिए फायदेमंद

अगर आपको स्टोन की शिकायत है तो प्याज का रस आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं. सुबह के समय खाली पेट प्याज का देा चम्मच रस आपको इस मुसीबत से छुटकारा दिला सकता है.

ब्लीडिंग समस्या खत्म करें

नाक से खून बह रहा हो तो कच्चा प्याज काट कर सूंघ लीजिए। इसके अलावा यदि पाइल्स की समस्या हो तो सफेद प्याज खाना शुरू कर दें।

डायबिटीज करे कंट्रोल

रोजाना प्याज खाने से इंसुलिन पैदा होता है। यदि आप डायबिटिक हैं तो इसे खाने के साथ रोज सलाद के रूप में खाएं।

दिल से संबंधित बीमारियां खत्म करेंकच्चा प्याज ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है। इसमें मिथाइल सल्फाइड और अमीनो एसिड होता है। इसीलिए यह कोलेस्ट्रॉल को भी काबू में रखता है और दिल को बीमारियों से बचाता है।

एनीमिया ठीक करे

रोजाना प्याज खाने से खून की कमी दूर होती है।

गठिया के इलाज में

अगर आपके घर में किसी को गठिया या जोड़ो का दर्द है तो प्याज के रस की मालिश करने से आराम मिलेगा. प्याज के रस को सरसों के तेल में मिलाकर मालिश करने से आराम मिलता है.

2.3.16

मौसम्बी के फायदे







मौसम्बी गर्मी के मौसम मे सबसे ज्यादा उपयोग किए जाने वाले फलों मे से एक है| मौसम्बी का जूस स्वास्थ्य के लिये बहुत अच्छा होता है। इसके जूस में ढेर सारा मिनरल और पौष्टिक तत्व जैस विटामिन सी और पोटैशियम आदि पाया जाता है। यह हेल्दी होने के साथ ही उर्जा पहुंचाने वाला भी होता है। लेकिन क्या आपको मालूम है कि इसे पीने से वजन भी नियंत्रित होता है। इस बारे में वैज्ञानिकों का मानना है कि नींबू के बाद मौसम्बी एक ऐसा स्वीट लाइम फ्रूट होता है जो शरीर के बढ़ते वजन को कम करने में मददगार साबित हो सकता है|
मौसमी का रस खून को साफ करने का रामबाण उपाय है इसके सेवन से फोड़े फुंसी व सरे तरह के त्वचा सम्बन्धी रोग दूर हो जाते है |
दिल के मरीज़ो के लिए मौसमी का जूस अत्यंत फायदेमंद है । क्यूंकि ये नसों को साफ कर खून के बहाव को संतुलित करता है अतः ज्यादा से ज्यादा मौसमी का फल या जूस ले तो दिल को सुरक्षा मिलेगी ।
टाइफाइड बुखार हो जाये तो मौसमी का रस सबसे उत्तम रहता है । इसके सेवन से नए रक्त का निर्माण होता है ।
जुकाम हो जाये तो अदरक के रस के साथ मौसमी का रस मिलाकर देने से लाभ मिलता है हाल की एक रिसर्च के मुताबिक मौसमी, नारंगी और संतरे जैसे खट्टे फलों में कई खास केमिकल और फ्लेवनॉयड होते हैं, जो दिल को जवां बनाए रखने में मददगार होते हैं।शरीर में कमजोरी आ जाये या काम की वजह से थकान हो तो मौसमी का एक गिलास जूस या दो मौसमी शक्ति से भर देती है ये शरीर में नए खून का निर्माण कर सीधे दिल और दिमाग में ताज़गी देती है ।
कब्ज़ के रोगियों को दोनों समय मौसमी का रस पीने से लाभ मिलता है ।

स्कर्वी से बचाती है, इम्यून सिस्टम सही रखती है, एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियल होती है, डैंड्रफ खत्म करती है, दोमुंहे बालों की समस्या से छुटकारा, एंटी-एजिंग का काम करती है, होंठों के कालेपन को दूर करती है, त्वचा में निखार लाती है।इम्यून सिस्टम सही रखती है|रोजाना इसके सेवन से इम्यून सिस्टम सही रहता है। साथ ही दिल की बीमारियों का भी खतरा कम रहता है।

इसी प्रकार मौसंबी को अपनी गर्दन, अंडरआर्म्स(कांखें), कोहनियों और घुटनों पर रगड़कर आप उन्हें भी साफ़ कर सकते हैं। मौसंबी के छिलकों को पीसकर उसे चेहरे पर लगाकर आप मुंहासों से छुटकारा पा सकते हैं। होंठों के कालेपन को दूर करने के लिए तथा फटे होंठों को ठीक करने के लिए दिन में तीन से चार बार मौसंबी का रस लगायें।




जिन्हे रात को नींद अच्छी न आती हो या रात में नींद ही न आती हो उन्हें सोने से पहले एक गिलास मौसमी का जूस पीना चाहिए ये तुरंत शरीर में पहुंच कर बैचनी को मिटा देती है और देह में आराम मिलता है ।

पाचन में फायदेमंद

मौसंबी में फ्लेवोनॉइड्स की भरपूर मात्रा किसी भी प्रकार के भोजन के पाचन में बहुत ही जरूरी होती है, इसलिए अपचन, गैस और पेट में मरोड़ जैसी समस्या होने पर मौसंबी का जूस पीने की सलाह दी जाती है। इसका जूस पीने से पेट में पचाने वाले जरूरी एंजाइम्स पैदा होते हैं जो बेकार के टॉक्सिन्स को बाहर निकालकर पाचन क्रिया को सही रखते हैं। इसका खट्टा-मीठा टेस्ट उल्टी, दस्त जैसी समस्याओं को भी दूर रखता है।
कब्ज से राहत दिलाती है
मौसंबी में मौजूद एसिड्स शरीर के हानिकारक तत्वों को बाहर निकालते हैं। साथ ही इसमें मौजूद फाइबर्स कब्ज की समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को राहत दिलाते हैं। इसके जूस में थोड़ा सा नमक मिलाकर पीने से कब्ज से राहत मिलती है
अमेरिकी जर्नल ′क्लीनिकल न्यूट्रिशन′ में प्रकाशित इस रिसर्च के अनुसार प्रतिदिन एक गिलास मौसमी का जूस पीने से रक्त नलिकाएं स्वस्‍थ रहती हैं, जो हृदय रोगों से बचाए रखती हैं।
ब्लड सर्कुलेशन को सही रखने के साथ ही इसमें मौजूद विटामिन सी की प्रचुर मात्रा कई प्रकार के इन्फेक्शंस जैसे सर्दी और खांसी से लड़ने में सहायक होती है।स्कर्वी से बचाती है विटामिन सी की कमी से होने वाला रोग है स्कर्वी। इसके कारण मसूड़ों में सूजन आ जाती है। साथ ही खून भी निकलता है। और-तो-और, मुंह में छाले, होंठों के फटने जैसी कई प्रकार की समस्याएं होने लगती हैं। सिर्फ कुछ दिनों तक लगातार मौसंबी का जूस पीकर इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।
इसके जूस में थोड़ी सा पानी और काला नमक डालकर पीना फायदेमंद होता है। यहां तक की इसे पीकर सांस से आने वाली बदबू को भी दूर किया जा सकता है।बालों को होने वाले फायदेमौसंबी में मौजूद कई सारे फायदों के कारण कंपनियां अब इसे कॉस्मेटिक्स में भी इस्तेमाल करने लगी हैं।
ब्लैकहेड्स, अंडर आई सर्कल (आँखों के नीचे के काले घेरे) और काले होंठ गर्मियों में होने वाली आम समस्या है। अनेक लोग इससे निपटने के लिए इसके लिए महंगी क्रीमों या फ़ेस वॉश का सहारा लेते हैं जबकि इसका उपचार बहुत आसान और सस्ता है। मौसंबी इसका सबसे अच्छा उपचार है।
एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियलमौसंबी में इन दोनों की अच्छी-खासी मात्रा होने से यह बालों के लिए भी काफी फायदेमंद है। इसे खाने के साथ ही इसका जूस पीने से बालों में चमक आ जाती है। साथ ही बाल मजबूत भी होते हैं।डैंड्रफ खत्म करती हैमौसंबी के रस का इस्तेमाल करके बालों से डैंड्रफ की समस्या को खत्म किया जा सकता है। इसके रस में मौजूद कई प्रकार के तत्व रूसी को रोकने के साथ ही लंबे और घने बालों के लिए भी बहुत कारगर होते हैं।










दो मुंहे बालों की समस्या से छुटकारा -धूल, प्रदूषण और बदलते मौसम के कारण लगभग सभी के साथ दोमुंहे बालों की समस्या हो जाती है, लेकिन थोड़ी सी सावधानी बरत कर इसे रोका जा सकता है। खाने के पहले या बाद, दिन में किसी भी एक वक्त रोजाना मौसंबी का जूस पिया जाए, तो बालों को दोमुंहे होने से बचाया जा सकता है।मौसंबी से त्वचा को होने वाले फायदेहेल्थ और हेयर के अलावा मौसंबी में ऐसे कई सारे न्यूट्रिएंट्स मौजूद होते हैं, जो त्वचा के लिए भी काफी फायदेमंद होते हैं।

इसकी मीठी खूशबू, इसमें मौजूद विटामिन सी की मात्रा, यहां तक की इसके गूदे का इस्तेमाल भी कई सारे ब्यूटी प्रोडक्ट्स को बनाने के लिए किया जाता है। इसके साथ ही यह रफ और डल स्किन के लिए मॉइश्चराइज़र का भी काम करती है।एंटी-एजिंग का काम करती हैमौसंबी के रस में कई सारे ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो त्वचा की गहराई में जाकर सफाई करते हैं। इससे चेहरे पर होने वाले कील-मुहांसे, दाग-धब्बों से छुटकारा मिलता है। साथ ही त्वचा सॉफ्ट भी बनी रहती है।

इससे चेहरे पर दिखने वाले असमय बुढ़ापे को रोका जा सकता है।होंठों के कालेपन को दूर करती हैइसके रस की 3-4 बूंदे रोजाना होंठों पर लगाने से कालेपन को कुछ ही दिनों में कम किया जा सकता है। साथ ही इससे लिप्स सॉफ्ट भी होते हैं।त्वचा में निखार लाती हैवैसे तो इसका जूस पीना बहुत ही फायदेमंद होता है, लेकिन इसके जूस में बेसन मिलाकर चेहरे के लिए ख़ास पेस्ट भी तैयार किया जाता है। इस पेस्ट को चेहरे पर 15 से 20 मिनट तक लगाकर रखें। सूखने के बाद इसे ठंडे पानी से धो लें। हफ्ते में दो बार ऐसा करके कुछ ही दिनों में इसका असर देखा जा सकता है।







इसी प्रकार मौसंबी को अपनी गर्दन, अंडरआर्म्स(कांखें), कोहनियों और घुटनों पर रगड़कर आप उन्हें भी साफ़ कर सकते हैं। मौसंबी के छिलकों को पीसकर उसे चेहरे पर लगाकर आप मुंहासों से छुटकारा पा सकते हैं। होंठों के कालेपन को दूर करने के लिए तथा फटे होंठों को ठीक करने के लिए दिन में तीन से चार बार मौसंबी का रस लगायें।

1.3.16

उड़द की दाल के फायदे




उड़द को एक अत्यंत पौष्टिक दाल के रूप में जाना जाता है|छिलकों वाली उड़द की दाल में विटामिन, खनिज लवण तो खूब पाए जाते हैं और कोलेस्ट्रॉल नगण्य मात्रा में होता है।उड़द की दाल में प्रोटीन, विटामिन बी थायमीन, राइबोफ्लेविन और नियासिन, विटामिन सी, आयरन, कैल्‍शियम, घुलनशील रेशा और स्टार्च पाया जाता है। उड़द वीर्य वर्द्धक, हृदय को हितकारी है। उड़द की दाल अन्य प्रकार की दालों में अधिक बल देने वाली व पोषक होती है। गरम मसाले डालकर बनाई हुई छिलके वाली उड़द दाल ज्यादा गुणकारी होती है




उड़द एक दलहन होता है। उड़द दाल सफेद और काली होती है और यह दक्षिण एशिया में सबसे अधिक पैदा होती है। उड़द की दाल एक अत्यंत बलवर्द्धक, पौष्टिक व सभी दालों से ज्यादा पोषक होती है। कमजोर पाचन वालों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए। उड़द का प्रयोग तमाम व्यंजन बनाने के काम आता है जैसे, डोसा, पापड़, वड़ा, लड्डू और दाल आदि। जिन लोगों की पाचन शक्ति प्रबल होती है, वे यदि इसका सेवन करें, तो उनके शरीर में रक्त, मांस, मज्जा की वृद्धि होती है।
उड़द की दाल में प्रोटीन, विटामिन बी थायमीन, राइबोफ्लेविन और नियासिन, विटामिन सी, आयरन, कैल्‍शियम, घुलनशील रेशा और स्‍टार्च पाया जाता है। उड़द वीर्य वर्द्धक, हृदय को हितकारी है। यह वात, अर्श का नाश करती है। यह स्निग्ध, विपाक में मधुर, बलवर्द्धक और रुचिकारी होती है। उड़द की दाल अन्य प्रकार की दालों में अधिक बल देने वाली व पोषक होती है। धुली हुई दाल प्रायः पेट में आफरा कर देती है। छिलकों वाली दाल में यह दुर्गुण नहीं होता। गरम मसालों सहित छिलके वाली दाल ज्यादा गुणकारी होती है। 
उड़द दाल के लाभकारी गुण
*प्रोटीन- वैसे तो हर दाल में भारी प्रोटीन होता है। वे लोग जो पैसे की कमी की वजह से मीट मछली नहीं खा पाते उनके लिये यह एक सस्‍ता आहार माना जाता है। शरीर के पूरे विकास और मासपेशियों की मजबूती के लिये प्रोटीन बहुत जरुरी है। प्रोटीन त्वचा, रक्त, मांसपेशियों तथा हड्डियों की कोशिकाओं के विकास के लिए आवश्यक होते हैं।
*पौरुष शक्ति बढाए- अगर काली उड़द को पानी में 6 से 7 घंटे के लिये भिगो कर उसे घी में फ्राई कर के शहद के साथ नियमित सेवन किया जाए तो पुरुष की यौन शक्ति बढती है तथा सभी विकार दूर होते हैं।
*दुबले लोग यदि छिलके वाली उड़द दाल का सेवन करे तो यह वजन बढाने में मदद करती है। अपनी दोनो समय के भोजन में उड़द दाल का सेवन करने वाले लोग अक्सर वजन में तेजी से इजाफा होता हैं|
*हृदय का स्वस्थ्य - कोलेस्ट्रॉल घटाने के अलावा काली उड़द स्वास्थ्य वर्धक होती है। यह मैगनीशियम और फोलेट लेवल को बढा कर धमनियों को ब्‍लॉक होने से बचाती है। मैगनीशियम, दिल का स्वस्थ्य ठीक रखती है क्योंकि यह रक्त प्रवाह को बढावा देती है।



फोडे फुन्सियों, घाव और पके हुए जख्मों पर उड़द के आटे की पट्टी बांधकर रखने से आराम मिलता है। दिन में 3-4 बार ऐसा करने से आराम मिल जाता है।
* पाचन शक्ति बढाए- जिन लोगों की पाचन शक्ति प्रबल होती है, वे यदि इसका सेवन करें, तो उनके शरीर में रक्त, मांस, मज्जा की वृद्धि होती है। इसमें बहुत सारे घुलनशील रेशे होते हैं जो कि पचने में आसान होते हैं।
*20 से 50 ग्राम उड़द की दाल छिलके वाली रात को पानी में भिगो दें, सुबह इसका छिलका निकालकर बारीक पीस लें। इस पेस्ट को इतने ही घी में हलकी आँच पर लाल होने तक भूनें, फिर उसमें 250 ग्राम दूध डालकर खीर जैसा बना लें, इसमें स्वाद के अनुसार थोड़ी सी मिश्री मिलाकर इसका सुबह खाली पेट सेवन करें।
इससे शरीर ,दिल और दिमाग की शक्ति बढती है.
एक सप्ताह तक इसका सेवन करने से पुराने से पुराना मूत्र रोग ठीक हो जाता है।
यदि युवतियाँ इस खीर का सेवन करें तो उनका रूप निखरता है।
स्तनपान कराने वाली युवतियों के स्तनों में दूध की वृद्धि होती है।
यदि गर्भाशय बहुत सारा आयरन होता है, जिसे खाने से शरीर को बल मिलता है। यह उन महिलाओं के लिये उपयुक्‍त है जिन्हें भारी महावारी होती है, और उनके अंदर आयरन की कमी हो जाती है। इसमें मांस के मुकाबले कई गुना अधिक आयरन होता है
*सप्ताह में तीन दिन भोजन में उड़द की छिलके वाली दाल का सेवन किया जाए, तो यह शरीर को बहुत लाभ करती है। यदि इसमें नींबू मिलाकर खाएँ तो इसका स्वाद बढ़ जाता है और पाचन भी सरल हो जाता है।में कोई विकार है तो दूर होता है।
*सुंदरता निखारे- चेहरे पर झाइयां और मुंहासों के दाग को उड़द दाल के फेस पैक से साफ किया जाता है। उड़द की बिना छिलके की दाल को रात को दूध में भिगो दिया जाए और सुबह इसे बारीक पीस लिया जाए। इसमें कुछ बूंदें नींबू के रस और शहद की डालकर चेहरे पर लेप किया जाए तो एक घंटे बाद इसे धो लिया जाए। ऐसा लगातार कुछ दिनों तक करने से चेहरे के मुहांसे और दाग दूर हो जाते है और चेहरे में नई चमक आ जाती है।
*छिलकों वाली उडद की दाल को एक सूती कपडे में लपेट कर तवे पर गर्म किया जाए और जोड दर्द से परेशान व्यक्ति के दर्द वाले हिस्सों पर सिकाई की जाए तो दर्द में तेजी से आराम मिलता है। काली उडद को खाद्य तेल में गर्म करते है और उस तेल से दर्द वाले हिस्सों की मालिश की जाती है। जिससे दर्द में तेजी से आराम मिलता है|