18.11.15

नेत्र रोगों का घरेलू ईलाज




नेत्र रोग

1) आँखों की सुरक्षा बहुत ही आवश्यक हैं। नेत्र दृष्टि बिना सब संसार सूना प्रतीत होता है अत: नेत्रों की सुरक्षा हेतु-
प्रात:काल ठन्डे जलसे आँखों को ८—१० बार धोना चाहिए।
2)  त्रिफला (हर्र बहेड़ा, आँवला) के चूर्ण को १ चम्मच १० ग्राम लेकर ५०० ग्राम जल में मिट्टी के साफ बर्तन में जो पानी भरते भरते पुराना हो गया हो तो उसमें त्रिफला रात्रि में भिगों दें प्रात:काल उसके छने पानी से आँखे धोने से नेत्र के समस्त रोग दूर हो जाते हैं।
नोट—आई वाश  नाम से प्लास्टिक का छोटा गिलास भी आता है उससे आँख धोने में सुविधा रहती है। 
3)  चश्मा उतारने का नुस्खा-
२० ग्राम त्रिफला चूर्ण को २५० ग्राम जल में धीरे—धीरे पकाएँ चौथाई शेष रहने पर उतार कर छान लें फिर उसमें २—१/२ ग्राम जल लौंह भस्म १०० पुटी की ३० पुड़िया बनाकर रख ले उसमें से १ पुडिया दवाई २ चम्मच देशी घी २ चम्मच चीनी (बूरा) मिलाकर प्रतिदिन पीने से नेत्र ज्योति शीध्र बढ़ जाती है। कम से कम २—३ माह करते रहे।
नोट— मिर्च, खटाई, कम खाएँ।

 4)  आईफ्लू— पर पाईरिमोन  आई ड्रॉप डालें।
बेटनो सोल आई ड्राप्प डालने से भी  ठीक होती है। आँखों पर काला चस्मा लगाए रखें। 
5)  फुली-आँख फुली होने पर लाल चन्दन स्वच्छ पत्थर पर पानी (जल) से घिसकर लगाने से फुली कट जाती है।
6) मोतियाबिन्द आने पर-
 2-3 हल्दी की छोटी-छोटी गाँठें ७ दिन तक प्राणसुधा  में भिगोकर रखें। बाद में निकाल कर पत्थर पर घिसकर जल में लगाएँ।
7) आँख में पानी झरना-
निर्मली के बीज को पानी या गुलाब जल में घिसकर आँखों में आजने से पानी का गिरना बन्द हो जाता है।
8)  रतौंधी-सौंठ, कालीमिर्च, पीपल—समभाग शहद में पीसकर अंजन करने से रतौधी दूर हो जाती है।

12.11.15

दाँत के दर्द मे उपयोगी उपचार








    दांतों में दर्द के कारण कि किसी काम में मन ही नहीं लगता और खाने-पीने से लेकर सोने तक में हमें तकलीफ होती है। अगर आप भी दांतों के दर्द से परेशान हैं या इससे हमेशा बचें रहना चाहते हैं तो ये हैं आपके लिए कुछ खास बातें जिन्हें जानेंगे तो दांत के दर्द से बचे रहेंगे-

दांत दर्द के कारण और लक्षण

1. दांत में संक्रमण।

2. कान में दर्द।

3. साइनस संक्रमण।

4.जबड़े में चोट आदि दांतों में दर्द के कुछ प्रमुख कारण हैं।

कुछ आयुर्वेदिक उपाय-


1. दांत के दर्द से मुक्ति  का एक प्राकृतिक विकल्प सरसों का तेल है। एक चुटकी नमक के साथ मिला कर इसे मसूढ़े के प्रभावित हिस्से पर मालिश करनी चाहिए।

2. नींबू के रस की कुछ बूंदें दांतों पर मलें, दांतों का दर्द दूर हो जाएगा।

3. मसूढ़े या दांत के प्रभावित हिस्से पर प्याज का ताजा कटा हुआ टुकड़ा रखें। दर्द बंद हो जाएगा।




4. फ्लोराइड टूथपेस्ट से ब्रश करें। माऊथ वॉश का यूज करें।

5. हर छ: महीने में दांतों के डॉक्टर से अपने दांतों की जांच करवाएं।

कैसे रखें दांतों का ख्याल-



* एस्प्रिन या एस्प्रिन वाले उत्पाद न लें।

* गर्म व ठंडा खाने से बचें।

* लौंग का फाहा दर्द वाले स्थान पर रखें।

*मुंह की अच्छी तरह से देखभाल करें।

5.11.15

नकसीर के उपचार









   ज्यादा गर्मी के कारण नाक से खून बहने लगता है जिसे नकसीर कहते हैं। नकसीर बंद करने के कई घरेलू उपाय  हैं| वैसे नाक से खून निकलना अपने आप में कोई रोग नहीं है लेकिन, जब बार-बार नाक से खून निकलता है तब यह एक रोग बन जाता है। नाक की अंदरूनी सतह के पास की रक्त वाहिकाएँ  फट जाती हैं। इस तरह की नकसीर  जल्दी ही ठीक हो जाती है और बहुत कम उपचार की जरूरत होती है। कभी-कभी रक्त वापस मुंह में भी चला जाता है जिससे श्वास नलिका मे रुकावट हो सकती है। स्थिति  गंभीर हो सकती है।कुछ गर्म खा लेने या बाहर की गर्मी लग जाने से नकसीर की समस्या कुछ लोगों को ज्यादा ही परेशान करती है। कुछ लोग अपनी नाजुक प्रकृति के कारण नाक पर जरा सी चोट लगते ही नाक से खून बहने की परेशानी से रूबरू हो जाते हैं|
1) रोगी के दोनों हाथों में बर्फ के टुकड़े रखने चाहिए तथा रोगी की  नाक पर बर्फ को कपडे में लपेट कर रोगी के सिर को  नीचे रखना चाहिए।

 2 ) काली मिट्टी पर पानी छिड़ककर इसकी खुशबू सूंघें।

3 ) रुई के फाए को सफेद सिरका में भिगोकर उस नथुने में रखें, जिससे खून बह रहा हो।

4) जब नाक से खून बह रहा हो तो कुर्सी पर बिना टेका लिए बैठ जाएं, नाक की बजाय मुंह से सांस लें।
5) किसी भी प्रकार के धूम्रपान (एक्टिव या पैसिव दोनों) से बचें।




6) पित्त शामक '' गुलकंद''का सेवन करे और साफ हरे धनिए की पत्तियों के रस की कुछ बूंदें नाक में डाल लें।

7) शीशम या पीपल के पत्तों को पीसकर या कूटकर , उसका रस नाक में 4-5 बूँद ड़ाल दिया जाए तो  तुरंत आराम आता है .

8) थोड़ा सा सुहागा पानी में घोलकर नथूनों पर लगाऐं नकसीर तुरन्त बन्द हो जाएगी।

9)  जिस व्यक्ति को नकसीर चल रही है उसे बिठाकर सिर पर ठण्डे पानी की धार डालते हुए सिर भिगों दें। बाद में थोड़ी पीली मिट्टी को भिगोकर सुंघाने से नकसीर तुरन्त बन्द हो जाएगी।




10) प्याज को काटकर नाक के पास रखें और सूंघें।
11) . जिस व्यक्ति को नकसीर चल रही है उसे बिठाकर सिर पर ठण्डे पानी की धार डालते हुए सिर भिगों दें। बाद में थोड़ी पीली मिट्टी को भिगोकर सुंघाने से नकसीर तुरन्त बन्द हो जाएगी

ऩकसीर रोगी के पथ्य परहेज 

नकसीर फूटने पर गरम पदार्थों जैसे  गरम मसाले, चाट-पकौड़े, चाय, कहवा, शराब या अन्य प्रकार के मादक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।  शरीर की सहनशीलता तथा स्वभाव से अधिक ठंडे पदार्थों को भी नहीं ग्रहण करना चाहिए। सम स्वभाव या तासीर के फल तथा सब्जियां खानी चाहिए। ठंडे पदार्थों का सेवन हितकारी रहता है।  वैसे पित्त को शान्त करने वाले नुस्खों का इस्तेमाल किया जा सकता है।