29.6.15

अच्छी सेहत मे विटामिन की महती भूमिका : A role of vitamins in good health



 विटामिन छोटे अणु होते हैं और  शरीर की विभिन्न गतिविधियों को चलाने के लिए इनकी जरूरत पड़ती है। हमारा शरीर अपने आप विटामिनों का निर्माण नहीं करता, इसलिए विटामिन उस भोजन से ही आना चाहिए जो हम खाते हैं। हमारे शरीर को 13 अलग-अलग विटामिनों की आवश्यकता होती है, जिनमें से ए, बी कॉम्प्लेक्स, सी, डी, ई और के बहुत महत्वपूर्ण हैं। जब कोई विटामिन आप पर्याप्त मात्रा में नहीं लेते, तब शरीर में इसकी कमी हो जाती है, जिससे अनेक स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं।





विटामिन ए

वसा में घुलनशील विटामिन ए मुख्य रूप से रेटिनॉइड और कैरोटिनॉइड, दो रूपों में पाया जाता है। सब्जियों का रंग जितना गहरा होगा, उनमें कैरोटिनॉइड की मात्रा उतनी ही अधिक होगी। अनेक कैरोटिन में से बीटा-कैरोटिन, अल्फा  कैरोटिन और बीटा-जैन्थोफिल सबसे महत्वपूर्ण हैं। यह विटामिन आंखों की रोशनी को बनाए रखता है। यह स्वस्थ त्वचा, दांतों, हड्डियों, मुलायम उतकों और म्युकस मेंब्रेन, प्रजनन और स्तनपान के लिए भी आवश्यक है। पालक, गाजर, कद्दू, ब्रोकली, गहरी हरी पत्तेदार सब्जियां, अंडे, मांस, दूध, पनीर, क्रीम, लीवर, किडनी और मछली जैसे पशु उत्पादों में यह प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। 'ईसकी कमी से रतौंधी रोग जन्म लेता है , बच्चों में विटामिन ए की कमी के कारण पाचन मार्ग और श्वसन मार्ग के ऊपरी भाग के संक्रमण का खतरा आदि रोग होते  हैं|

विटामिन बी

इसमें सम्मिलित हैं विटामिन बी1 (थियामिन), राइबोफ्लेविन (विटामिन बी12),  नियासिन (विटामिन बी3), पैंटोथोनिक एसिड (विटामिन बी5), पाइरिडॉक्सिन (विटामिन बी6), बायोटिन (विटामिन बी7), फॉलिक एसिड (विटामिन बी9) और कोबालामिन (विटामिन बी12)। प्रत्येक की विशिष्ट संरचना और विशिष्ट कार्य होते हैं।
बी1 और बी2 मांसपेशियों, तंत्रिकाओं और हृदय की कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक हैं। बी3 तंत्रिका और पाचन तंत्र को नियंत्रित करने में सहायता करता है। बी6 इम्यून तंत्र को सहारा देता है और प्रोटीन को तोडऩे में शरीर की सहायता करता है। बी9 ब्रेस्ट कैंसर को रोकने में सहायता करता है। बी12 सर्वाइकल कैंसर की आशंका को कम करता है। साबुत अनाज, पालक, फलियां, अंकुरित अनाज, अंडे का पीला भाग, डेयरी उत्पाद, सुखे मेवे, किडनी और मांस विटामिन बी कॉम्प्लेक्स के अच्छे स्रोत माने जाते हैं।


विटामिन सी

यह एक एंटीऑक्सीडेंट है। विटामिन सी शरीर में एकत्र नहीं होता। यह शरीर की कोशिकाओं को एक साथ रखता है और रक्त नलिकाओं की दीवार को मजबूत करता है। दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ  रखता है। इम्यून तंत्र को मजबूत बनाता है। ब्रोकली, अंकुरित अनाज, गोभी, खट्टे फल, पालक, स्ट्रॉबेरीज, टमाटर आदि इसके स्रोत हैं। इसकी कमी से एनीमिया हो जाता है। मसूड़े कमजोर और दांत ढीले हो जाते हैं। इसकी कमी से त्वचा पर झुर्रियां पड़ जाती हैं।

विटामिन डी

      यह एक मात्र विटामिन है, जो हमें धूप से मुफ्त में मिलता है, फिर भी भारत में 49 प्रतिशत शहरी और 20 प्रतिशत ग्रामीणों में इसकी कमी है। यह शरीर में कैल्शियम के स्तर को नियंत्रित करता है, जो तंत्रिका तंत्र की कार्य प्रणाली और हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत सूर्य की किरणें हैं। 





     जब हमारे शरीर की खुली त्वचा सूरज की अल्ट्रावॉयलेट किरणों के संपर्क में आती है तो ये किरणें त्वचा में अवशोषित होकर विटामिन डी का निर्माण करती हैं। इसके अलावा दूध, अंडे, चिकन, मछलियां भी विटामिन डी के अच्छे  स्रोत हैं। इसकी कमी से 'मांसपेशियों की कमजोरी,  जोड़ो में दर्द ,'मार्निंग सिकनेस ,शारीरिक कमजोरी आती है।

ऑस्टियोपोरोसिस से पीडि़त 50 प्रतिशत महिलाओं में विटामिन डी की कमी पाई जाती है।

एक अनुमान के अनुसार विश्व के एक तिहाई बच्चे विटामिन ए की कमी से पीडि़त हैं।

जिनके रक्त में विटामिन सी का स्तर अधिक होता है, उनमें स्ट्रोक की आशंका 42 प्रतिशत कम हो जाती है।

विटामिन के-2 का पर्याप्त मात्रा में सेवन करने से डायबिटीज का खतरा 20 प्रतिशत तक कम हो जाता है।

विटामिन बी6 को सबसे ज्यादा स्थिर विटामिन माना जाता है।

सप्ताह में तीन दिन 15 मिनट तक धूप में बैठने से शरीर अपने लिए जरूरी विटामिन डी का निर्माण कर लेता है।

वसा में घुलनशील विटामिनशरीर के वसा उतकों में संग्रहित होते हैं। चार विटामिन वसा में घुलनशील होते हैं, ए, डी, ई और के। पानी में घुलनशील विटामिनों को शरीर सीधे उपयोग कर लेता है। बचे हुए विटामिन यूरीन के द्वारा शरीर से बाहर निकल जाते हैं। विटामिन बी12 पानी में घुलनशील इकलौता विटामिन है, जो लीवर में कई वर्षों तक स्टोर रह सकता है। इनकी कुल संख्या 9 हैं।

आपको कितने विटामिन की प्रतिदिन आवश्यकता होती है, यह आपकी उम्र और लिंग पर निर्भर करता है। दूसरे तत्व  जैसे गर्भावस्था और आपका स्वास्थ्य भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रतिदिन संतुलित भोजन खाएं। ऑस्टियोपोरोसिस से पीडि़त लोगों को कैल्शियम और विटामिन डी, विशेषकर विटामिन डी3 और बायोफास्फोनेट को सप्लीमेंट के रूप में लेने की सलाह दी जाती है। 





विटामिन "के" भी हड्डियों की मजबूती बढ़ाता है, इसलिए कई लोगों को यह विटामिन भी सप्लीमेंट के रूप में दिया जाता है। वसा में घुलनशील विटामिनों ए, डी, ई और के को सावधानीपूर्वक लें, क्योंकि ये वसा कोशिकाओं में संग्रहित हो जाते हैं, आपके शरीर में एकत्र होते रहते हैं और हानिकारक प्रभाव उत्पन्न करते हैं।
---------------------------------------

18.6.15

हृदय निरोग रखने के उपचार : treatments to Keep Heart Healthy










    अनियमित  और अत्यधिक व्यस्त जीवन तथा खानपान के प्रति लापरवाही  से हृदय  रोगियों की संख्या मेन तीव्र ईजाफ़ा किया है| फास्टफूड़  हमारे पारंपरिक भोजन पर  भारी पड़ रहा है\| , अधिक चिकनाई और मांसाहार के बढ़ते चलन  से हालात और भी बिगड़ गए हैं||






हर पांचवा व्यक्ति है दिल का मरीज:


    अनुसंधान  के  आंकड़ों पर यकीन करें तो भारत में हर पांचवां व्यक्ति दिल का मरीज है। दिल के रोगियों को हमेशा यह उलझन रहती है कि वे किस प्रकार का भोजन करें या किस प्रकार का भोजन न करें।


कोलेस्ट्रॉल का माया जाल -


    माना जाता है कि सबसे पहले परहेज है तेल व घी का मगर चूंकि शरीर को वसा की हमेशा जरूरत रहती है, इसलिए इसे पूरी तरह भोजन से हटाया नहीं जा सकता। एक मिथक हे कि कोलेस्ट्रॉल दिल के रोगों का सबसे बड़ा कारण है । पर सच क्या है , मिथक नहीं बताते । आइए एक नजऱ डालते हैं अच्छे और बुरे दोनों ही तरह के कोलेस्ट्रॉल पर -    


कोलेस्ट्रॉल दोस्त भी दुश्मन भी:


   कोलेस्ट्रॅाल एक पीला, चिकना और वसायुक्त पदार्थ है जो रक्त में रहता है। यह धमनियों में बायोलोजिकल प्लेक के एकत्रित होने का मुख्य कारण है। इससे हृदय रोग की संभावना बढ़ जाती है।


लेकिन कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए केवल हानिकारक ही नहीं है बल्कि शरीर में नये सेल्स और हार्मोन्स बनाने में मददगार भी है। कोलेस्ट्रॉल केवल तब नुकसान पहुंचाता है जब शरीर में इसकी मात्रा बढ़ जाती है। यह रक्त प्रवाह में फैल जाता है तो आर्टरी वाल्स पर इसकी मात्रा अधिक हो जाने से धमनियों और रक्त प्रवाह में बाधा उत्पन्न करता है और हार्ट-अटैक, आघात और एंजाइना पेन होने की संभावना बढ़ जाती है।



कई तरह के कोलेस्ट्रॉल-

डायटरी कोलेस्ट्रॉल, सीरम, एचडीएल और एलडीएल , कोलेस्ट्रॉल से मिलते-जुलते हैं।डायटरी कोलेस्ट्रॉल जानवरों से प्राप्त खाद्य पदार्थो में और सीरम कोलेस्ट्रॉल हमारी रक्तधारा में पाया जाता है, । एचडीएल कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर सेहत के लिए अच्छा होता है लेकिन एलडीएल कोलेस्ट्रॉल एचडीएल की धमनी में बाधा उत्पन्न कर सकता है इसका उच्च स्तर सेहत के लिए अच्छा नहीं है।


खान-पान पर रखें नियंत्रण:-

 अगर प्रतिदिन संतुलित आहार लें तो रक्त में कोलेस्ट्रॉल के बढऩे की संभावना कम रहती है। आहार का संतुलन इस बात पर निर्भर है कि वह किस स्त्रोत से प्राप्त हुआ है और किस प्रकार तैयार किया गया है। भोजन में 20 से 30 प्रतिशत कैलोरी फैट , 90 फीसदी पॉलीअनसेचुरेटेड और 10 फीसदी सेचुरेटेड फैट होना चाहिए। रक्त में कोलेस्ट्रॉल बढऩे न पाए इसलिए कुछ सावधानियां बरतें।

बचें चिकनाई से:-

    बुद्धिमानी यही होगी कि मीट, मक्खन, पनीर और हाइड्रोजेनेटिक ऑयल जैसे सेचुरेटेड फैट वाले खाद्य कम कर दें। इनकी जगह मछली, चिकन, अंडा, कम वसायुक्त डेरी उत्पाद और मक्का, सनफ्लावर या सोयाबीन के तेल का सेवन करे। ऑलिव ऑयल, एवकाडोस ऑयल, केनोला और पीनट ऑयल में मोनोअनसेचुरेटेड फैट पाया जाता है। यह कोलेस्ट्रॉल को कम करता है।
हृदय रोगी नमक, मिर्च तथा तले-भुने भोजन का प्रयोग कम से कम करें या हो सके तो न ही करें । हरी पत्तेदार सब्जियों एवं फल का सेवन अधिक से अधिक मात्रा में करना चाहिए।

       यदि रोगी धूम्रपान, शराब या अन्य किसी नशीली वस्तु का सेवन करता है तो उसे इन पदार्थों का सेवन बंद कर देना चाहिए। तेल ,घी, मक्खन मावा व क्रीम इत्यादि का सेवन कम से कम करना चाहिए।


   आंवला ,गाजर अया लहसुन का सेवन प्रतिदिन करने से राहत मिलती है ।  सेब के मुरब्बे का सेवन हृदय रोगियों को विशेषकर करना चाहिए। हल्के-फुल्के व्यायाम तथा सुबह की सैर को अपनी दिनचर्या में अवश्य शामिल करें ।    

   फलियों व अन्य दालों में पानी में, घुलनशील रेशा होता है, जिसे पेक्टिन कहते है। यह कोलेस्ट्रॉल के चारों ओर एक संरक्षक की भांति फैल जाता है और शरीर को हानि पहुंचाने से पहले ही उसे शरीर से बाहर कर देता है। हर रोज एक कप पकी फलियां आपके लिए पर्याप्त होंगी।

खूब फल-सब्जियां खाएं


   फलों में भी पेक्टिन के कारण कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने की क्षमता होती जई भी फायदेमंद पेक्टिन रिचफ्रूट की तरह ही जई का आटा भी सीरम कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक होता है।  एक अध्ययन के मुताबिक मेडिकल छात्रों को चार सप्ताह तक प्रतिदिन जई के आटे से बनी दो रोटी खाने को दी गई, तो उनके सीरम कोलेस्ट्रॉल में 5.3 फीसदी की कमी पाई गई।


मकई को भोजन में शामिल करे


 एक अध्ययन के मुताबिक जिन लोगों का कोलेस्ट्रॉल काफी बढ़ा हुआ था, उन्होंने कम कोलेस्ट्रॉल वाले आहार के साथ एक टेबल स्पून मकई का चोकर प्रतिदिन नाश्ते और खाने से पहले सूप या टमाटर के जूस में मिलाकर लिया तो 12 सप्ताह के बाद उनके कोलेस्ट्रॉल लेवल में 20 फीसदी की कमी देखी गई।


अंडा खाएं पर ध्यान से-


अंडों में 275 एम.जी. कोलेस्ट्रॉल होता है। अगर आप अंडा पसंद करते है तो सप्ताह में आप तीन अंडे ले सकते है। अंडे के पीले भाग में कोलेस्ट्रॉल होता है इसलिए इसका अधिक सेवन आपकी सेहत के लिए सुरक्षित नहीं है। परंतु अंडे के सफेद हिस्से को आप अधिक मात्रा में ले सकते हैं।


बदलें जीवन शैली: - 


 खान-पान और जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन करके दिल का बचाव किया जा सकता है। जेगिंग व व्यायाम तथा एरोबिक धमनियों के अंदर कोलेस्ट्रॉल के जमाव को कम करने में सहायक होते हैं। यें खाने के बाद खून में फैली वसा को साफ करते हैं। विषषेज्ञों का मानना है कि जो लोग व्यायाम नहीं करते है उनकी तुलना में एक धावक अपने शरीर से वसा को हटाने में 70 फीसदी आगे होता है। सप्ताह में तीन बार 20 मिनट तक टहलना हृदय के लिए लाभकारी होता है। लेकिन किसी भी प्रकार का व्यायाम शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना अच्छा है।


वजन न बढऩे दें-


वजन बढऩे से शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा भी बढऩे लगती है। नीदरलैंड में 20 वर्षो तक चले एक अध्ययन से पता चला है कि शरीर का वजन सीरम कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने के लिए अकेला जिम्मेदार है। शरीर के वजन में प्रत्येक 2.2 पौंड बढऩे से कोलेस्ट्रॉल लेवल 2 प्वाइंट बढ़ जाता है।


लहसुन गाजर लाभप्रद -


प्रतिदिन आंवला या दो गाजर खाने के अलावा फूलगोभी, ब्रॉक्ली और प्याज भी  अच्छे परिणाम देते है। कच्चा लहसुन भी हानिकारक रक्त वसा को कम कर सकता है। एक अध्ययन के अनुसार प्रतिदिन कच्चे लहसुन की एक कली खाने से ट्राईग्लिसराइड 13 फीसदी कम हो जाता है। हो सकता है आपको इसकी गंध पसंद न हो लेकिन अब एक ऐसे लहसुन द्रव्य का पता चला है जिसमें गंध नहीं होती।


कॉफी, धूम्रपान से दूर रहे-


एक अध्ययन में पाया गया कि प्रतिदिन दो से ज्यादा कप कॉफी पीने वालों का कोलेस्ट्राल तीव्र गति से बढ़ा। एक स्वीडिश अध्ययन दर्शाता है कि धूम्रपान करने वाले लाभकारी एचडीएल कोलेस्ट्रॉल लेवल की कमी से ग्रस्त होते है।


ट्राइग्लिसराइडस कम करें-


 एक अन्य प्रकार का ब्लड फैट ट्राईग्लिसराइड ज्यादा खतरनाक हो सकता है । 50 वर्ष से ऊपर की महिलाओं व एलडीएल या एचडीएल के असंतुलित अनुपात वाले पुरुषों में यह हार्ट अटैक के कारणों को एक चौथाई बढ़ा सकता है।


डाईट थेरेपी-


जिनका एलडीएल कोलेस्ट्रॉल हाई है और एचडीएल कोलेस्ट्राल कम है उनके लिए डायट थेरेपी फायदेमंद है। यह थेरेपी प्रत्येक व्यक्ति के लिए भिन्न-भिन्न तरीकों से कोलेस्ट्रॉल कम करने का कार्य करती है। इसके  लिए सबसे पहलेे आप इस बात का परीक्षण कीजिए कि किस प्रकार का आहार आपके लिए सही है। लेकिन यह परीक्षण एक ही प्रकार के या कुछ प्रकार के खाद्य पदार्थो पर न करें क्योंकि विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थो में कोलेस्ट्रॉल से लडऩे की अपनी अलग क्षमता होती है ।

आपके दिल को मजबूत रखने के लिए आपका डाइट चार्ट ऐसा होना चाहिए :

*सुबह सात बजे- दूध मलाई रहित एक गिलास दो चम्मच शक्कर के साथ। बादाम 7 नग 


*सुबह नौ बजे- अंकुरित अनाज एक प्लेट मिक्स या वेजीटेबल उपमा।


*दोपहर 12 बजे- दो चपाती चौकर सहित, छिलके वाली दाल एक कटोरी, चावल आधा कटोरी, हरी सब्जी एक कटोरी, दही एक कटोरी, सलाद एक प्लेट।


*तीन या चार बजे- चाय एक कप, भेल एक प्लेट या बिस्किट दो, फल एक (सेव, संतरा, कच्चा जाम, अनार, नाशपती आदि।)


*रात सात या आठ बजे- दोपहर जैसा खाना।


*रात नौ बजे- फल एक या दूध आधा गिलास।


     दिनभर में दो-तीन चम्मच घी व चार-पांच चम्मच तेल का उपयोग भोजन में करना चाहिए। हृदय रोगी को नमक, मिर्च तथा तले-भुने भोजन का प्रयोग कम से कम करना चाहिए या हो सके तो नहीं करना चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जियों एवं फल का सेवन अधिक मात्रा में करना चाहिए। यदि रोगी धूम्रपान, शराब या अन्य किसी नशीली वस्तु का सेवन करता है तो उसे शीघ्र ही इन पदार्थों का सेवन बंद कर देना चाहिए। घी, मक्खन इत्यादि का सेवन कम से कम करना चाहिए।


आंवला या लहसुन का सेवन प्रतिदिन करना चाहिए। सेब के मुरब्बे का सेवन हृदय रोगियों को विशेषकर करना चाहिए। हल्के-फुल्के व्यायाम तथा सुबह की सैर को अपनी दिनचर्या में अवश्य शामिल करना चाहिए।

--------------------------------------