29.5.15

गठिया के उपचार : Arthritis Treatment


 

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    जब चलने-फिरने में तकलीफ होने लगे तो मन में तुरंत एक बीमारी का नाम आता है और वह है गठिया। यूं तो यह बीमारी आम-सी हो गई है, लेकिन इसका दर्द कई बार जीना मुहाल कर देता है। इससे बचाव के लिए क्या करें, क्या न करें-
    शारीरिक रूप से स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है। अपने सारे काम हम शरीर से ही तो करते हैं, लेकिन कई बार कुछ बीमारियों के कारण हम परेशान भी हो जाते हैं। उन्हीं में से एक बीमारी है गठिया। इसमें शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है, जिसकी वजह से जोड़ों में सूजन आ जाती है। ऐसे में पीडित दर्द के कारण ज्यादा चल नहीं सकता, दौड़ नहीं सकता, यहां तक कि हिलने-डुलने में भी परेशानी होने लगती है। पैरों के अंगूठे में इसका असर सबसे पहले देखने को मिलता है। अंगूठे बुरी तरह से सूज जाते हैं और तब तक ठीक नहीं होते, जब तक कि उनका इलाज न करवाया जाए। कई बार तो उंगलियों के जोड़ों में यूरिक एसिड के क्रिस्टल जमा हो जाते है, जिससे उंगलियों के जोड़ों में बहुत दर्द होता है। इस रोग की सबसे बड़ी पहचान ये है कि रात को जोड़ों का दर्द बढ़ता है और सुबह थकान महसूस होती है। इसका उपचार अगर जल्दी न कराया गया तो यह बीमारी भयंकर रूप ले सकती है। इसलिए हम आपको बता रहे हैं कि इसमें किन चीजों से परेहज करें और किन चीजों को डाइट में शामिल करें।

    क्या न खाएं

    अल्कोहल और सॉफ्ट ड्रिंक के सेवन से बचें: वैसे तो गठिया से पीडित व्यक्तियों को ढेर सारा पानी पीने और तरल पदार्थों का सेवन करने को कहा जाता है, लेकिन अगर वे अल्कोहल और सॉफ्ट ड्रिंक का सेवन करते हैं तो उनकी समस्या और भी बढ़ सकती है। अल्कोहल खासकर बीयर शरीर में यूरिक एसिड के लेवल को तो बढ़ाता ही है और तो और शरीर से गैर जरूरी तत्व निकालने में शरीर को रोकता है। अगर आप बीयर पीने के आदी हैं तो डॉंक्टर की सलाह लेकर एक या दो ड्रिंक ले सकते हैं। उसी तरह सॉफ्ट ड्रिंक खासकर मीठे पेय या सोडा से बचें, क्योंकि इसमें फ्रेक्टोस नामक तत्व होता है, जो यूरिक एसिड के बढ़ने में मदद करता है।

    एक शोध से यह बात सामने आई है कि जो लोग ज्यादा मात्रा में फ्रेक्टोस वाली चीजों का सेवन करते हैं, उनमें गठिया होने का खतरा दोगुना हो जाता है।

मछली और मीट से परहेज करें:

खाने-पीने के शौकीन लोगों को अपने पसंदीदा खाने को छोड़ना पड़े तो उन्हें बहुत मुश्किल होती है। उन्हें भी और उनके परिवार वालों को भी। लेकिन बात जब अपनों की सेहत से जुड़ी हो तो थोड़ा ख्याल तो रखना ही पड़ता है। जब आपको गठिया हो तो उन खाद्य पदार्थों को खाने से बचना चाहिए, जिनमें अधिक मात्रा में प्यूरिन पाया जाता हो, क्योंकि ज्यादा प्यूरिन हमारे शरीर में ज्यादा यूरिक एसिड पैदा करता है। रेड मीट, हिलसा मछली, टूना, और एन्कोवी जैसी मछलियों में काफी मात्रा में प्यूरिन पाया जाता है, इसलिए इन्हें अपने खाने की मेन्यू से हटा दें।
परहेज - जितनी भी खाने-पीने की चीजें हमें कुदरत ने दी हैं, वे किसी बीमारी में फायदा करती हैं तो किसी में नुकसान भी करती हैं, इसलिए हमें उनका चुनाव अपने शरीर के हिसाब से करना होगा। उदाहरण के तौर पर लें तो शतावरी, पत्तागोभी, पालक, मशरूम, टमाटर, सोयाबीन तेल जैसी चीजें हमारे स्वस्थ खानपान का हिस्सा हैं, लेकिन गठिया से पीडित व्यक्तियों को इनसे परहेज करना चाहिए। जैसे कि 99 ग्राम पालक में 100 मिलीग्राम प्यूरिन पाया जाता है।
पथ्य -
गाजर, शकरकंद और अदरक का सूप पिएं:
गठिया परेशान कर रही है तो जड़ों वाले फल और सब्जियां जैसे गाजर, आलू, शकरकंद या दूसरे फल खाएं। आप अदरक का सूप भी पी सकते हैं। इनमें प्यूरिन की मात्रा काफी कम होती है।

योग के कतिपय रूप गठिया रोग में अत्यंत लाभकारी हो सकते हैं जो निम्न चित्र में दिखाए गये हैं-








संधिवात में निम्न योगा लाभकारी सिद्ध हुए हैं-



वीर भद्रासन




भुजंगासन





पवन मुक्तासन



बालासन



विशिष्ट परामर्श::
संधिवात,,कमरदर्द,गठिया, साईटिका ,घुटनो का दर्द आदि वात जन्य रोगों में जड़ी - बूटी निर्मित हर्बल औषधि ही अधिकतम प्रभावकारी सिद्ध होती है| रोग को जड़ से निर्मूलन करती है| बिस्तर पकड़े पुराने रोगी भी दर्द मुक्त होकर चल फिर सकने योग्य हो जाते हैं|औषधि के लिए वैध्य दामोदर से 98267-95656 पर संपर्क करने की सलाह दी जाती है|

12.5.15

खांसी से पाएं तुरंत राहत : Get instant relief from cough






     गले और सांस के रास्ते को साफ रखने का महत्वपूर्ण तरीका है खांसना। लेकिन अधिक खांसने का मतलब है कुछ अंदरूनी विकार। गंभीर खांसी अचानक शुरू होती है और आम तौर पर अधिक से अधिक दो से तीन सप्ताह तक चलती है। पुरानी खांसी भी दो से तीन सप्ताह तक चलती है। एलर्जी या उत्तेजना लाने वाली खांसी उस स्थिति का सामान्य संकेत है जो आम तौर पर प्रत्येक व्यक्ति के अंदर धूल, धुंआ, धुंध आदि जैसे उद्दीपकों के प्रति संवेदनशीलता के कारण होती है।





     


खांसी का मूल कारण अंदरूनी या वंशगत एलर्जी होती है। यदि इस समस्या का समय पर इलाज नहीं  किया जाए तो इससे टॉल्सिलाइटिस, साइन्यूसाइटिस, एडेनोइडाइटिस हो सकता है तथा तेज दवाओं से दबा देने से गंभीर सांस के रोग हो सकते हैं। 

   तेज खांसी है और गले में दर्द है तो इलायची या किशमिश चबाना चाहिए, इससे कुछ समय में राहत मिलती है।एक कप चाय में नींबू के रस और एक चम्मच शहद मिला लें फिर इस मिश्रण को दिन में 4-5 बार पीएं इससे खांसी ठीक हो जाएगी। खट्टा भोजन अचार, रसम, सॉस/केचअप, सांभर, टमाटर का सूप, सिरका, गोल गप्पे, इमली। 
    ठंडे और वायु युक्त पेय कोक, फेन्टा, फू्रटी, लिम्का, माजा, पेप्सी आदि। फलों के रस, खासकर स्ट्रिस फलों जैसे संतरा और मौसमी का रस। ठंडा पानी, आईस क्रीम, दही, लस्सी। सामान्य तापमान ताजा मीठा दही लिया जा सकता है।

     खांसी और गले में दर्द तो नहाने से पहले दालचीनी को गुनगुने  पानी में डाल दें और उस पानी  को नहाने के पानी में मिला दें। उसी पानी से स्नान करें,जरूर  फायदा होगा। 


  खांसी की गोलियाँ-
सत्यानाशी की कोमल जड़  काटकर  लावें और छाया में सुखावें| इसका चूर्ण बनालें|  इतनी ही वजन की काली मिर्च मिलाकर  इसे  लहसुन के रस में भली प्रकार घोटकर  चने के बराबर  गोलियां बनालें|  इन गोलियों को छाया में सुखालें|
  विधि- एक-एक गोली दिन में ३ बार तजा पानी से लें| जब खांसी का वेग तब गोली मुंह में रखकर चूसें| खांसी को शीघ्र ही नियंत्रित करती है|