20.3.10

खून की कमी (रक्ताल्पता) के सरल उपचार.




                                                             


शरीर में हेमोग्लोबिन या रक्त कण की कमी हो जाने को एनिमिया अर्थात रक्ताल्पता का रोग कहा जाता है। हमारे शरीर की शिराओं और धमनियों में जो खून प्रवाहित होता है उसमें करीब आधा भाग रक्त कणों का होता है। ये रक्तकण आक्सीजन को शरीर के विभिन्न ऊतकों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। इन रक्त कणों के निर्माण में आयरन (लोहतत्व), प्रोटीन, और विटामिन्स ,खास कर फ़ोलिक एसिड और विटामिन बी१२ की अहम भूमिका रहती है। इन रक्त कणों का जीवन काल लगभग चार माह का होता है । फ़िर ये नष्ट हो जाते हैं और इनकी जगह नये रक्त कण आ जाते हैं। इन्सान के शरीर के १०० ग्राम खून में करीब १५ ग्राम हेमोग्लोबिन होना आवश्यक है।  प्रति मिलि लिटर खून में ५ मिलियन रक्तकण मौजूद  रहना जरूरी है। यह भी बताते चलें कि हमारी मज्जा(bone marrow) में रक्तकण बनाने की फ़ेक्टरी है जो रोजाना तकरीबन १०० मिलियन  नये रक्त कण बनाकर शरीर को सप्लाई करती रहती है।






रक्ताल्पता के लक्षण-
  शरीर में खून की कमी हो जाने पर रोगी कमजोरी, थकावट, शक्तिहीनता और चक्कर आना जैसे लक्षण बताता है। अन्य लक्षण गिनावें तो चमडी पर समय पूर्व  झुर्रियां पड जाना ,याददाश्त की कमी,  मामूली काम करने या चलने पर सांस फ़ूल जाना, घाव हो जाने पर उसके ठीक होने या भरने में जरूरत से ज्यादा वक्त लगना,सिर दर्द होना और दिल की धडकन  बढ जाना ये लक्छण भी रक्त की कमी के रोगी में अक्सर देखने को मिलते हैं।  एनिमिया रोगी की श्लेष्मिक झिल्लियां पीली दिखाई देती हैं।
 कैसे करें घरेलू नुस्खों से खून कमी रोग का ईलाज?
शरीर में लोह तत्व बढाने के लिये सबसे अच्छा तरीका यह है भोजन से इसकी पूर्ति करें। चाय,काफ़ी और अम्ल विरोधि (एन्टासिड) दवाएं उपयोग में न लाएं। ये चीजें शरीर द्वारा  लोह तत्व ग्रहण करने की  प्रक्रिया को बाधित करते हैं।  लोह तत्व की वृद्धि के लिये हरे मटर,हरे चने(छोले),अंडे,मछली, कलेजी दूध का प्रचुर उपयोग करना उत्तम है। जो लोग शाकाहारी हैं वे अपने भोजन में पालक,सभी तरह की हरी सब्जियां, दालें  अंजीर,अखरोट बदाम काजू, किशमिश,खजूर, आदि रक्त वर्धक पदार्थो का भरपूर उपयोग  करना चाहिये।सेवफ़ल,टमाटर भोजन में शामिल करें।
एक कप सेवफ़ल के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर नित्य पीने से खून की कमी दूर होती है।
 टमाटर और सेवफ़ल का रस प्रत्येक २०० मिलिलिटर मिश्रण करके रोज सुबह लेने से रक्ताल्पता में आशातीत लाभ होता है।

ताजा सलाद खाने और शहद से शरीर में हेमोग्लोबिन बढकर एनिमिया का निवारण होता है।

विटमिन बी१२, फ़ोलिक एसिड,और विटामिन सी ग्रहण करने से हेमोग्लोबिन की वृद्धि होती है। दूध,मांस,गुर्दे और कलेजी में प्रचुर विटामिन बी१२ पाया जाता है।






   मैथी की सब्जी  कच्ची खाने से लोह तत्व मिलता है। किशोरावस्था की लडकियों में होने वाली खून की कमी में मैथी की पत्तियां उबालकर उपयोग करने से बहुत फ़ायदा होता  है।



 मैथी के बीज अंकुरित कर नियमित खाने से रक्ताल्पता का निवारण होता है।
सभी पत्तेदार सब्जीयां और खासकर पालक में प्रचुर मात्रा मे लोह तत्व पाया जाता है।  इनसे  मिलने वाला आयरन श्रेष्ठ दर्जे का होता है। यह लोह तत्व शरीर में ग्रहण होने के बाद बडी तेजी से रक्त कण बनते हैं और रक्ताल्पता शीघ्र ही दूर हो जाती है।
   खून की कमी दूर करने में सोयाबीन का  महत्वपूर्ण स्थान है। इसमे आयरन होता है और श्रेष्ठ दर्जे का प्रोटीन भी होता है।  लेकिन एनिमिया रोगी की पाचन शक्ति कमजोर होती है इसलिये सोयाबीन का दूध बनाकर पीना उचित रहता है।

  ७ नग बादाम दो घन्टे पानी में गला दें। फ़िर छिलका उतारकर खरल में पेस्ट बनाकर रोज खाने से नया खून बनता है और रक्ताल्पता मे लाभ होता है।

     आयरन की गोलियां सरकारी दवाखाने में फ़्री दी जाती हैं। अच्छा फ़ायदा करती है।
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